
पाली। लूनी-जोधपुर और मारवाड़ जंक्शन के बीच 71.62 किलोमीटर लंबे लूनी-मारवाड़ रेलखंड के दोहरीकरण में अब रेलवे बोर्ड की अनुमति का इंतजार है। इस 750 करोड़ रुपए की परियोजना की अंतिम डीपीआर रेलवे बोर्ड को भेज दी है। इस मार्ग का दोहरीकरण होने के बाद गुजरात के बंदरगाहों से आने वाला आयातित कोयला, सीमेंट, क्लिकर और अन्य औद्योगिक सामान राजस्थान होते हुए पंजाब-हरियाणा तक पहले से अधिक तेज और सुगमता से पहुंच सकेगा। माल परिवहन के साथ यात्री ट्रेनों के संचालन में भी बड़ा सुधार होगा।
उत्तर-पश्चिमी रेलवे के जोधपुर मंडल के सबसे महत्वपूर्ण रेलखंडों में शामिल लूनी-मारवाड़ सेक्शन अभी सिंगल रेल लाइन का है। जिस पर यात्री और मालगाड़ियों का संचालन होता है। यह रेलखंड केवल पाली और जोधपुर के साथ पश्चिमी और उत्तर भारत के बीच माल परिवहन व रणनीतिक महत्व रखता है। गुजरात के प्रमुख बंदरगाहों पर उतरने वाला आयातित कोयला, सीमेंट, क्लिकर और अन्य औद्योगिक सामग्री इसी मार्ग से राजस्थान होकर पंजाब और हरियाणा तक पहुंचती है। डबल लाइन बनने से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए कम इंतजार करना पड़ेगा और परिवहन क्षमता में वृद्धि होगी।
इस परियोजना का सीधा लाभ राजस्थान के खनिज क्षेत्र को मिलेगा। बीकानेर और नागौर क्षेत्र से निकलने वाले जिप्सम की आपूर्ति गुजरात के सीमेंट संयंत्रों तक इसी रेलमार्ग से हो सकेगी। इसकी लोडिंग बड़वासी स्टेशन से प्रस्तावित है। इससे खनिज परिवहन अधिक व्यवस्थित होगा और उद्योगों तक कच्चा माल कम समय में पहुंच सकेगा।
मारवाड़ जंक्शन पर अजमेर, पालनपुर और लूनी तीनों दिशाओं से ट्रेनों का आवागमन होता है। सिंगल लाइन के कारण यहां अक्सर ट्रेनों को क्रॉसिंग का इंतजार करना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद लाइन क्षमता बढ़ेगी, परिचालन अधिक सुचारू होगा और भविष्य में नई यात्री व मालगाड़ियां चलाने की संभावना मजबूत होगी।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि गुजरात के बंदरगाहों की बढ़ती हैंडलिंग क्षमता, नए औद्योगिक निवेश और मौजूदा उद्योगों के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में इस रेलखंड पर माल यातायात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसी को देखते हुए यह परियोजना दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
परियोजना के तहत 2 बड़े, 3 महत्वपूर्ण और 33 छोटे पुल बनाए जाएंगे। इसके अलावा 7 स्टेशन, जिनमें 2 जंक्शन और 5 क्रॉसिंग स्टेशन शामिल हैं। परियोजना पूरी होने पर पाली और जोधपुर क्षेत्र के रेल नेटवर्क को नई क्षमता मिलेगी और पश्चिमी भारत से उत्तर भारत तक रेल परिवहन अधिक तेज, सुरक्षित और प्रभावी हो सकेगा।
लूनी-मारवाड़ रेलखंड की डीपीआर तैयार हो चुकी है। जो रेलवे बोर्ड को भेजी है। इस मार्ग के दोहरीकरण की दिशा में कार्य चल रहा है। यह कार्य जल्द धरातल पर आएगा।
-अमित सुदर्शन, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ), रेलवे, जयपुर