
-नागेश शर्मा
Pali Mission Manas: पाली: गांव की आखिरी ढाणी में रहने वाला वह परिवार, जिसके पास रहने के लिए पक्का घर नहीं…परिवार की महिला सरकारी पेंशन की पात्र है, लेकिन उसे पेंशन नहीं मिल रही…घर का युवा मजदूरी करता है, लेकिन उसका श्रमिक कार्ड नहीं बना…बच्चे आंगनबाड़ी से नहीं जुड़े…परिवार के पास पशु हैं, लेकिन उनका टीकाकरण नहीं हो रहा और न ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा। अब ऐसे परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रशासन खुद इनके घर तक पहुंचेगा।
पाली जिला कलक्टर डॉ. रविंद्र मानस गोस्वामी ने 'मिशन मानस (कल्याण)' के नाम से ऐसा ही नवाचार शुरू किया है। इसका मकसद सरकारी योजनाओं से वंचित परिवारों को तलाशना, उनकी जरूरत समझना और एक-एक परिवार को उसकी पात्रता के अनुसार योजनाओं से जोड़ना है। जिले की 260 ग्राम पंचायतों में अब तक 5,092 परिवार चिन्हित किए जा चुके हैं। पहले चरण में हर ग्राम पंचायत से 20 परिवार चयनित किए जाएंगे। खास बात यह है कि प्रशासन इन परिवारों को सिर्फ एक योजना का लाभ दिलाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करेगा। परिवार की जरूरत के अनुसार आवास से लेकर स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, बच्चों से लेकर महिलाओं तक और रोजगार से लेकर पशुधन तक का पूरा पैकेज तैयार किया जाएगा।
चयनित परिवारों को पात्रता के अनुसार आवासीय पट्टा, श्रमिक कार्ड, आवास, शौचालय, पेंशन, आयुष्मान आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा जाएगा। घर में शून्य से छह वर्ष तक के बच्चे हैं, तो उनका सर्वे कर उन्हें आंगनबाड़ी से जोड़ा जाएगा। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। परिवार के पशुओं का सर्वे कर उनका टीकाकरण करवाया जाएगा और उन्हें पशुधन योजनाओं से जोड़ा जाएगा। व्यक्तिगत भूमि पर वीबी-जी रामजी के तहत काम स्वीकृत कराने, महिलाओं को राजीविका से जोड़कर आजीविका का साधन उपलब्ध कराने और पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा का लाभ दिलाने का भी प्रयास होगा।
अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा परिवार का सर्वे है। प्रशासन पहले यह जानने का प्रयास करेगा कि परिवार की वास्तविक जरूरत क्या है। किसी परिवार के पास जमीन है, लेकिन आवास नहीं, तो किसी के पास पशु हैं, लेकिन पशुपालन से आय नहीं हो रही। किसी परिवार की महिला पेंशन की पात्र है, तो किसी घर के छोटे बच्चे आंगनबाड़ी से बाहर हैं। कहीं श्रमिक कार्ड नहीं बना, तो कहीं परिवार को खाद्य सुरक्षा का लाभ नहीं मिल रहा। यानी एक ही योजना सबके लिए नहीं, बल्कि परिवार की जरूरत के हिसाब से समाधान किया जाएगा। चयनित परिवारों को 'आत्मनिर्भर परिवार कार्ड' दिया जाएगा। इसके जरिए परिवार को उपलब्ध कराए गए लाभ और बाकी जरूरतों को चिह्नित कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पाली पंचायत समिति की 24, रोहट की 23, बाली की 47, देसूरी की 24, सुमेरपुर की 30, सोजत की 37, मारवाड़ जंक्शन की 46 और रानी की 29 ग्राम पंचायतों को अभियान में शामिल किया गया है।
जिले की 260 ग्राम पंचायतों में अब तक 5,092 परिवार चिह्नित किए गए हैं। इनमें ऐसे परिवार शामिल हैं, जो दूर-दराज के इलाकों में रहकर आर्थिक कठिनाइयों में जीवनयापन कर रहे हैं और सरकारी सुविधाओं से वंचित बताए गए हैं। प्रशासन इस अभियान को पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना प्लस पाली से जोड़कर आगे बढ़ाएगा।
जिला कलक्टर डॉ. रविंद्र गोस्वामी ने कहा, 'मिशन मानस (कल्याण)' में नर को नारायण मानकर काम कर रहे हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना प्लस पाली के नाम से इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे। इसमें उन परिवारों का चयन करेंगे, जिन्हें कोई सुविधा नहीं मिली है। इन्हें सुविधा मिलने का अर्थ यह मान सकते हैं कि गांव में सरकार की योजना घर-घर पहुंच गई।
मिशन का लक्ष्य परिवार को हमेशा सरकारी सहायता पर निर्भर रखना नहीं, बल्कि उसे आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए परिवार को 21 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि देने तथा स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन के लिए एक लाख रुपए तक व्यय करने का प्रावधान रखा गया है। यानी किसी परिवार की जरूरत के अनुसार पशुपालन, रोजगार या अन्य आजीविका गतिविधि विकसित करने की दिशा में काम होगा।
अभियान की निगरानी के लिए जिला कलक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय कमेटी बनाई गई है। इसकी हर तीन माह में बैठक होगी। समिति की बैठक हर माह होगी। परिवारों के सर्वे के लिए ग्राम प्रभारी नियुक्त किए जाएंगे। प्रक्रिया में कोशिश यह रहेगी कि चिन्हित परिवार सिर्फ कागजों पर लाभार्थी न बनें, बल्कि वास्तव में उनके घर तक सुविधाएं पहुंचें।