पाली जिले में सोजत शहर के पूरणेश्वरधाम में राठौड़ परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र, अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास, मथुरा के उपाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का अवसर बार-बार नहीं मिलता। जो लोग कथा सुन रहे हैं, वे भाग्यशाली हैं।
Srimad Bhagavatam Katha: पाली के सोजत शहर स्थित पूरणेश्वरधाम में राठौड़ परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्तिमय माहौल बना रहा। कथा के दौरान श्रीराम जन्मभूमि क्षेत्र, अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि न्यास, मथुरा के उपाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने श्रीमद्भागवत की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण का अवसर बार-बार नहीं मिलता और जो लोग इस पुण्य अवसर का लाभ उठा रहे हैं, वे अत्यंत भाग्यशाली हैं। स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज ने कहा कि गुरु के चरणों में जाना और उनका सान्निध्य प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि गुरु चरणों में ही स्वर्ग का वास होता है।
उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करती है तथा जीवन को सही दिशा देने का कार्य करती है। कथा के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्तव्यों और जीवन के उद्देश्य को समझ पाता है।
आयोजन में राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी भी शामिल हुए। उन्होंने संतों के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों ने सदैव समाज को दिया है, उन्होंने कभी कुछ लिया नहीं। जैसे वृक्ष अपने फल और बीज स्वयं नहीं खाता, उसी प्रकार संतों का जीवन भी त्याग और सेवा के लिए होता है। कोठारी ने कहा, वर्तमान समय में स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज द्वारा 48 संस्थानों में गीता ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, जो समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है।
उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर भी चिंता जताई और कहा कि आज की शिक्षा हिंदुस्तानी संस्कारों को गढ़ने में असफल हो रही है। ऐसे समय में संत समाज लोगों को जागरूक कर सही मार्ग दिखाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि पत्रिका समूह भी समाज में मूल्यों और संस्कारों के संवर्धन के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रहा है और आज भी अपने सिद्धांतों से जुड़ा हुआ है।