
रायपुर मारवाड़। मारवाड़ क्षेत्र में जुगाड़ एक ऐसा शब्द है जो हर किसी के समझ में बड़ी आसानी आ जाता है। जी हां हम आज ऐसे ही एक जुगाड़ से आप को रूबरू करने जा रहे है। एक सरकारी योजना है, जिसे चलाने के लिए ग्राम पंचायतों को हर महिने जुगाड़ लगाना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं जनता जल योजना की। इस योजना में ग्राम पंचायतों की देखरेख में जलापूर्ति की जाती है। सरकार ने जब योजना लागू की तब बजट भी दिया जाता था, लेकिन अब इस योजना के नाम पर बजट देना बंद कर दिया। ऐसे में ग्राम पंचायतों को दूसरी योजनाओं की राशि का इस योजना में उपयोग कर काम चलाना पड़ रहा है।
फिर कैसे बहाएं विकास की गंगा
इस मामले को लेकर पत्रिका ने 13 ग्राम पंचायतों के अधिकांश सरपंचों से बात की। जिसमें यह बात सामने आई कि जनता जल योजना के तहत अलग से बजट नहीं दिए जाने से उन्हें विकास कार्यों के लिए दिए जाने वाले बजट को इस योजना में खर्च करना पड़ रहा है। इससे विकास कार्य कराने में परेशानी आ रही है। इन 13 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश ग्राम पंचायतों के पास निजी आय का कोई स्रोत तक नहीं है। इससे उन्हें आर्थिक परेशानी से रूबरू होना पड़ रहा है।
मार्च में चल जाती है डिस्कॉम की कैंची
दरअसल, ग्राम पंचायतें बजट के अभाव में समय पर डिस्कॉम के बिल नहीं चुका पाती है। डिस्कॉम अधिकारी भी वर्ष भर उधारी में बिजली दे देते हैं। मार्च क्लोजिंग के दौरान डिस्कॉम रिकवरी अभियान चलाती है तब वे रिकवरी के अभाव में ग्राम पंचायत के कनेक्शन पर कैंची चला देते हैं। इससे कई दिनों तक योजना प्रभावित होती है। ये हालात दो साल से भी अधिक समय से हैं। जनप्रतिनिधियों ने कई बार जिला परिषद व पंचायत समिति की साधारण सभा की बैठक में भी इस मुद््दे को उठाया और अलग से बजट आवंटन की मांग उठाई लेकिन आज तक राहत नहीं मिली।
एसएफसी का बजट जनता जल योजना में
दरअसल, उपखण्ड क्षेत्र की 35 में से 13 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों के हलक जनता जल योजना के तहत तर किए जा रहे हैं। इस योजना का संचालन ग्राम पंचायत अपने स्तर पर करती आ रही है। इस योजना के संचालन के लिए ग्राम पंचायत ने एक कार्मिक अपने स्तर पर लगा रखा है। जिसे तीन हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है। बिजली का बिल भी ग्राम पंचायत को ही भरना पड़ता है। अब हालात ये हैं कि जिला परिषद ने ग्राम पंचायतों को इस योजना के संचालन के लिए अलग से बजट जारी करना बंद कर दिया है। इससे ग्राम पंचायतों को इस योजना के संचालन के लिए एसएफसी योजना का बजट इस योजना में खर्च करना पड़ रहा है।
नहीं मिलता बजट
जनता जल योजना के लिए जिला परिषद की और से अलग से बजट देना बंद कर दिया गया है। ऐसे में हमें एसएफसी योजना के बजट से इस योजना को चलाना पड़ रहा है। कई बार बजट आवंटन की मांग की लेकिन आज तक अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया है। ऐसे में बड़ी परेशानी का सामना करते हुए जनता जल योजना का संचालन कर रहे हैं। -मीनू कंवर राठौड़, सरपंच, बिराटिया खुर्द