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DMIC Project: पाली-जोधपुर की बदलेगी तस्वीर, दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में तेज हुआ काम, मिलेगा रोजगार

Delhi-Mumbai Industrial Corridor: जेपीएमआईए की ओर से डीएमआईसी प्रोजेक्ट के विकास कार्यों में तेजी लाई गई है, जिससे पाली और जोधपुर में औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल रही है।

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May 07, 2026
डीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत चल रहा कार्य। फोटो- पत्रिका

पाली। जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया (जेपीएमआईए) की ओर से दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) क्षेत्र के विकास की गति तेज कर दी गई है। यह गति पाली व जोधपुर की तस्वीर बदलेगी। नए उद्योगों के आने से रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ शहरों में भी बड़े बदलाव आएंगे। डीएमआईसी के तहत तीन चरण ए, बी व सी में कार्य होने हैं।

जेपीएमआईए की उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीता पंकज ने बताया कि चरण-ए के तहत 641.8840 हेक्टेयर भूमि पर सड़क, विद्युत, जलापूर्ति, सीईटीपी एवं एटीपी सहित आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं। चरण-बी के लिए 1086.4494 हेक्टेयर भूमि की अवाप्ति की गई है। अवाप्त भूमि से संबंधित खसरों एवं खातेदारों का भौतिक सत्यापन राजस्व विभाग ने पूरा कर लिया है।

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किया जा रहा मुआवजा राशि का भुगतान

मुआवजा राशि का भुगतान खातेदारों को किया जा रहा है। भूमि के बदले नकद मुआवजा प्राप्त करने के लिए सहमति या विकल्प प्रस्तुत करने वाले खातेदारों को अब तक 15.81 करोड़ रुपए दिए जा चुके हैं। जिन काश्तकारों ने मुआवजे के रूप में विकसित भूमि प्राप्त करने का विकल्प चुना है, उन्हें भूमि आवंटन के लिए आरक्षण पत्र जारी किए जा रहे हैं। डीएमआईसी के तीसरे चरण-सी के लिए 1373.3594 हेक्टेयर निजी भूमि की अवाप्ति के लिए एजेंसी के माध्यम से रिपोर्ट उद्योग विभाग को भेजी गई है, जिसका परीक्षण किया जा रहा है।

काश्तकारों के लिए राहत की खबर

वहीं दूसरी तरफ रोहट में दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (डीएमआईसी) प्रोजेक्ट के तहत अवाप्त भूमि के मुआवजे की राह देख रहे काश्तकारों के लिए राहत की खबर है। राजस्थान पत्रिका की ओर से बुधवार के अंक में 'ढिलाई से अटका मुआवजा, काश्तकार चक्कर काटने को मजबूर' शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर इस गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। खबर का असर यह हुआ कि प्रशासन तुरंत हरकत में आया और सुबह ही पटवारी ने सभी 53 बकाया रिपोर्ट 'जोधपुर पाली मारवाड़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन' को भेज दीं।

चंद घंटों के भीतर सभी रिपोर्ट भेजी

हैरानी की बात यह है कि पत्रिका में मुद्दा उठते ही चंद घंटों के भीतर सभी रिपोर्ट भेज दी गईं। इससे साफ जाहिर होता है कि रिपोर्ट पटवारी के पास पहले से तैयार थीं, लेकिन उन्हें रोका गया था। चर्चा है कि पटवारी और भू-माफियाओं की मिलीभगत के चलते काश्तकारों को परेशान किया जा रहा था, ताकि देरी का सीधा फायदा भू-माफिया उठा सकें। रिपोर्ट समय पर नहीं पहुंचने के कारण रीको और जेपीएमआईए काश्तकारों के खातों में मुआवजा राशि जमा नहीं कर पा रहे थे।

पटवारी की ओर से सभी रिपोर्ट ऑनलाइन प्रेषित किए जाने के बाद अब काश्तकारों के खातों में मुआवजा राशि आने का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि आगामी कुछ दिनों में किसानों के हक का पैसा उनके बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

रोहट में डीएमआईसी प्रोजेक्ट के तहत पटवारी के पास जो भी रिपोर्ट बकाया थीं, उन्हें जेपीएमआईए को भेज दिया गया है। अब एक भी रिपोर्ट लंबित नहीं है।

  • पूरण कुमार, उपखंड अधिकारी, रोहट

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