MP News: पत्रिका ने 22 अप्रैल 2026 के अंक में गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में मुख्य मार्ग के करीब नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिलने के मामले को उजागर किया था।
MP News: मध्यप्रदेश में पन्ना टाइगर रिजर्व से आई एक चौंकाने वाली घटना ने वन्यजीव संरक्षण की जमीनी हकीकत उजागर कर दिया। जंगल के भीतर नर बाघ का कंकाल मिलने के बाद न सिर्फ विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हैं, बल्कि निगरानी तंत्र की गंभीर खामियां भी सामने आ गई हैं। मामला उजागर होते ही कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है, बीटगार्ड रामसफल बैगा को निलंबित कर दिया गया, जबकि वनपाल कमल किशोर मोची और रेंजर सागर शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
पत्रिका ने 22 अप्रैल 26 के अंक में गंगऊ अभ्यारण क्षेत्र में मुख्य मार्ग के करीब नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मिलने के मामले को उजागर किया था। जांच अधिकारियों के प्राथमिक अनुमान के अनुसार बाघ की मौत करीब 10 से 15 दिन पहले हो चुकी थी। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर शव मिला, वह अधिकारियों और कर्मचारियों के रोजाना आवागमन का हिस्सा है। इसके बावजूद इतने दिनों तक किसी को इसकी भनक न लगना, पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। घटना के सामने आते ही पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन सक्रिय हुआ और जांच के आदेश दिए गए।
वहीं, जबलपुर से पहुंची एसटीएफ टीम ने मौके का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। अब जांच एजेंसियां इस पहलू को खंगाल रही हैं कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई साजिश छिपी है। इस पूरे मामले में एम-स्ट्राइप्स जैसे हाईटेक मॉनिटरिंग सिस्टम की प्रभावशीलता भी कठघरे में है। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद यदि जंगल में एक बाघ का शव दिनों तक यूं ही पड़ा रहे, तो यह व्यवस्था की गंभीर नाकामी को दर्शाता है।
विभाग के भीतर भी इस घटना को लेकर हलचल है और निगरानी तंत्र की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है, जो बाघ की मौत की असली वजह उजागर करेगी। लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने सुरक्षित जंगल के दावे पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी नजर रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस रहस्य से पर्दा उठाएगी और तय करेगी कि बाघ की मौत लापरवाही थी या कोई गहरी साजिश।
बीते दिन पन्ना पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे गांव में एक बाघिन ने दो बछड़ों का शिकार कर ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। जशवंतपुरा और विक्रमपुर के बाद अब तारा गांव में बाघिन की मौजूदगी दर्ज की गई है। बाघिन ने गांव की सीमा पर डेरा जमाया और तड़के सुबह इस घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना मिलते ही पीटीआर प्रबंधन हाई अलर्ट पर आ गया है। बाघिन को आबादी वाले क्षेत्र से खदेड़ने के लिए वन विभाग ने चार प्रशिक्षित हाथियों की मदद ली है।