प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर लाया जा रहा है पानी, कॉलेज परिसर के दोनों बोरिंग सूखने के बाद से बिगड़े हालात
पन्ना. जिले के अग्रणी छत्रसाल महाविद्यालय विगत तीन माह से भीषण जल संकट से जुझ रहा है। कॉलेज में छात्रों के पीने के लिए समुचित पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। कॉलेज प्रबंधन द्वारा अस्थायी व्यवस्था के तहत केंद्रीय विद्यालय के पास स्थित बोरिंग के पास से प्लास्टिक के डिब्बों में पानी भरवाकर रिक्सा से मंगवाया जा रहा है।
पीने के लिए मटकों में भरा जा रहा पानी
गौरतलब है कि जिले के महाराजा छत्रसाल कॉलेज को अग्रणी कॉलेज का दर्जा प्राप्त है। यहां पानी की व्यवस्था के लिए कॉलेज परिसर में दो बारिंग हैं। एक बोरिंग नगर पालिका की है और दूसरी कॉलेज की है। बताया गया कि गर्मी के दौरान कॉलेज परिसर में लगे दोनों बोरिंगों का पानी सूख गया था।
केंद्रीय विद्यालय के पास की बोरिंग से
बारिश के सीजन के करीब तीन माह पूरे होने को हैं और धरम सागर तालाब से कॉलेज की दूरी भी ज्यादा नहीं है। इसके बाद भी दोनों बोरिंग अभी भी रिचार्ज नहीं हो पाए हैं। इसके कारण इनसे कॉलेज के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इसी के कारण यहां का वाटर कूलर खाली पड़ा रहता है। कॉलेज आने वाले छात्र-छात्राएं इसमें पानी की स्थिति देखकर वापस लौट जाते हैं।
प्लास्टिक के डब्बों में, रिक्सा से ढो रहे पानी
कॉलेज परिसर में पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रबंधन की ओर से अस्थायी तौर पर केंद्रीय विद्यालय के पास स्थित बोरिंग से पानी मंगाया जा रहा है। वहां से प्लास्टिक के डिब्बों में भरकर पानी को रिक्से से ढोया जाता है। यहां कॉलेज की गैलरी में रखी प्लास्टिक की टंकी में पानी को स्टोर किया जा रहा। इसी पानी का उपयोग पीने सहित अन्य दूसरे कामों में किया जाता है। छात्र-छात्राओं को पीने के पानी की व्यवस्था के लिए प्लास्टिक की टंकी के पास ही दो मटके रखे गए हैं।