पटना

बांका के मंदिर से 2 बच्चों संग बांग्लादेशी दंपती गिरफ्तार, बोले-वहां हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा, जान बचाने आए

Bangladeshi Couple Arrested in Bihar: बिहार के बांका जिले के एक मंदिर से पुलिस ने दो बच्चों के साथ रह रहे एक बांग्लादेशी दंपती को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में दंपती ने अवैध रूप से भारत आने की बात स्वीकार की और दावा किया कि वे बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से बचने के लिए यहां पहुंचे थे।
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Jun 28, 2026
bangladeshi couple arrested in bihar
बच्चे के साथ बांग्लादेशी कपल

Bangladeshi Couple Arrested: बिहार के बांका जिला में स्थित प्रसिद्ध राधा-कृष्ण मंदिर (जमदाहा ठाकुरबाड़ी) से पुलिस ने अवैध रूप से रह रहे एक बांग्लादेशी दंपती को उनके दो बच्चों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस की पूछताछ में दंपती ने कबूल किया है कि वे एक दलाल को 20,000 रुपये देकर अवैध रास्ते से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर भारत आए थे। जमदाहा ओपी पुलिस ने विदेशी अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दंपती को बांका न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

ठाकुरबाड़ी के संचालक की सजगता से हुआ भंडाफोड़

जमदाहा ठाकुरबाड़ी के संचालक विजय राय को मंदिर परिसर में रह रहे इस नए परिवार की गतिविधियों और बोली-भाषा पर कुछ संदेह हुआ था। उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी। संचालक ने पुलिस को बताया कि एक दंपती अपने दो बच्चों के साथ उत्तर प्रदेश के वृंदावन से ठाकुरबाड़ी में सेवा-अर्चना करने के बहाने आया है और यहीं रह रहा है। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने ठाकुरबाड़ी पहुंचकर संदिग्धों को हिरासत में ले लिया। जब पुलिस ने उनसे पूछताछ की, तो उन्होंने सच उगल दिया और माना कि उनके पास भारत में प्रवेश करने या ठहरने का कोई वैध पासपोर्ट या वीजा नहीं है।

गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी दंपति की पहचान कर ली गई है। पति का नाम मिल्टन हल्दर (पिता हरेंद्र नाथ हल्दर) है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के बरिशाल जिला अंतर्गत ओजिपुर थाना क्षेत्र के कुरोलिया ग्राम का निवासी है। वहीं, उसकी पत्नी की पहचान झुमारानी दास (पिता सुनील चंद्र दास) के रूप में की गई है, जो बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मुन्सिगंज जिले की रहने वाली है।

जान बचाने के लिए छोड़ा मुल्क

पूछताछ के दौरान मिल्टन और उसकी पत्नी झुमारानी ने पुलिस को बताया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) पर अत्याचार हो रहा है और उनके परिवार के कुछ सदस्य अचानक लापता हो गए। इसलिए अपनी जान बचाने के लिए बांग्लादेश छोड़ने का फैसला किया। करीब ढाई महीने पहले उन्होंने बॉर्डर पर एक एजेंट को 20,000 रुपये दिए और अवैध रास्तों से भारतीय सीमा में घुसे।

बंगाल से वृंदावन और फिर बिहार

अवैध रूप से सीमा पार करने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए इस परिवार ने लगातार अपने ठिकाने बदले। भारत में घुसने के बाद वे सबसे पहले पश्चिम बंगाल पहुंचे। हालांकि, पश्चिम बंगाल में पकड़े जाने के डर से वे वहां ज्यादा दिन नहीं रुके और उत्तर प्रदेश के वृंदावन भाग गए। वृंदावन में कुछ समय तक भगवान की सेवा और पूजा-पाठ की आड़ में रहने के बाद, वे बिहार के बांका जिले के कटोरिया स्थित जमदाहा ठाकुरबाड़ी पहुंच गए।

बिना सिम का मोबाइल और बांग्लादेशी दस्तावेज जब्त

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने ठाकुरबाड़ी में उनके कमरे की तलाशी ली। इस दौरान कमरे से कपड़ों के अलावा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसमें कोई भी सिम कार्ड मौजूद नहीं था। इसके साथ ही पुलिस को महिला के पास से बांग्लादेश के राष्ट्रीय पहचान पत्र की फोटोकॉपी मिली, जबकि मिल्टन ने अपने मोबाइल की गैलरी में सेव रखी अपने बांग्लादेशी पासपोर्ट की तस्वीर पुलिस को दिखाई। पुलिस ने इन सभी सामग्रियों को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है।

कोर्ट के आदेश पर दंपती जेल और बच्चे रिमांड होम भेजे गए

जमदाहा ओपी पुलिस ने बिना वैध दस्तावेजों के भारत की सीमा में अवैध प्रवेश करने और निवास करने के आरोप में विदेशी अधिनियम की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दंपती को बांका कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत (जेल) में भेजने का आदेश दिया। वहीं, मानवीय आधार और कानूनी नियमों का पालन करते हुए, उनके दोनों मासूम बच्चों को कोर्ट के निर्देश पर बाल सुधार गृह भेज दिया गया है।

Published on:
28 Jun 2026 08:32 am