बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे चर्चित हॉट सीट बन गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है, जिस पर जल्द उपचुनाव होना है।
बांकीपुर विधानसभा सीट एक बार फिर बिहार की सबसे बड़ी हॉट सीट बन गई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है, जिस पर अब उपचुनाव होना है। नितिन नबीन लंबे समय तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं, इसलिए यह चुनाव राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
इधर, जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर इस सीट को लेकर काफी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने उपचुनाव को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाई है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर बीजेपी को हराने के लिए महागठबंधन से भी सहयोग मांग रहे हैं। उनकी कोशिश है कि इस सीट पर मुकाबला सीधे बीजेपी और जन सुराज के बीच हो, ताकि लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही बांकीपुर सीट पर बड़ा उलटफेर किया जा सके।
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही है। नितिन नबीन लगातार पांच बार इस सीट से विधायक चुने गए हैं। उनसे पहले उनके पिता भी लंबे समय तक इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। जातीय समीकरण के लिहाज से यह इलाका कायस्थ बहुल माना जाता है, जिसे बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक भी समझा जाता है।
इस सीट पर बीजेपी की पकड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2015 में लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार और कांग्रेस के मजबूत महागठबंधन की लहर के बावजूद विपक्ष यहां बीजेपी को हराने में सफल नहीं हो पाया था। अब चूंकि इस सीट के पूर्व विधायक नितिन नबीन राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा चेहरा बन चुके हैं, इसलिए बांकीपुर उपचुनाव सभी राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है।
प्रशांत किशोर इस सीट पर महागठबंधन के समर्थन के सहारे जीत हासिल करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। मोतिहारी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वे पहले ही कह चुके हैं कि बांकीपुर सीट जीतने के लिए जो भी करना पड़ेगा, वह करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि जन सुराज को इस उपचुनाव में महागठबंधन का समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, बांकीपुर सीट पर महागठबंधन, खासकर आरजेडी और कांग्रेस की स्थिति ज्यादा मजबूत नहीं मानी जाती। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि विपक्ष भाजपा को हराने के लिए अंदरूनी तौर पर प्रशांत किशोर का समर्थन कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महागठबंधन अपने पारंपरिक कैडर वोट, खासकर अल्पसंख्यक और यादव मतदाताओं, जिनकी संख्या करीब 60 हजार बताई जा रही है, को रणनीतिक तौर पर PK के पक्ष में शिफ्ट करवा सकता है। अगर ऐसा होता है तो बांकीपुर में बीजेपी को कड़ी टक्कर मिल सकती है।