
Bankipur By Election:पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। इस उपचुनाव में जनसुराज और बीजेपी के बीच सीधा और कड़ा मुकाबला होने की संभावना है। यह चुनाव दोनों दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। एक ओर बांकीपुर को बीजेपी का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, वहीं दूसरी ओर यह प्रशांत किशोर के लिए चुनावी राजनीति की बड़ी परीक्षा होगी।
यदि प्रशांत किशोर यह चुनाव हारते हैं, तो एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं, यदि बीजेपी यह सीट गंवाती है, तो इसे विपक्ष की बड़ी राजनीतिक सफलता और भाजपा के लिए बड़ा झटका माना जाएगा। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से जुड़ी होने के कारण भी काफी अहम मानी जा रही है।
प्रशांत किशोर की कोशिश इस सीट पर जीत दर्ज कर यह संदेश देने की है कि नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली जीत का अंतर उतना निर्णायक नहीं था, जितना प्रचारित किया गया। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने में महागठबंधन का समर्थन उनके लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कांग्रेस ने विपक्षी एकजुटता की वकालत करते हुए अप्रत्यक्ष रूप से प्रशांत किशोर के समर्थन के संकेत दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने इस संबंध में प्रशांत किशोर तक अपना संदेश भी पहुंचाया है। कांग्रेस का मानना है कि बांकीपुर पिछले करीब 30 वर्षों से बीजेपी का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में यदि विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़ता है, तो जीत की संभावना बढ़ सकती है। इसी सोच के तहत कांग्रेस प्रशांत किशोर का समर्थन करने के पक्ष में दिखाई दे रही है।
वहीं, राजद की ओर से भी इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। हालांकि, सीट बंटवारे और अन्य मुद्दों पर अभी कुछ पेंच बाकी हैं, जिनका समाधान आपसी बातचीत के जरिए निकाले जाने की उम्मीद है।
उधर, बीजेपी ने अभी तक बांकीपुर उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन पार्टी ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस संबंध में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि बांकीपुर की जनता एक बार फिर पार्टी का साथ देगी, क्योंकि पूर्व विधायक नितिन नवीन ने क्षेत्र में व्यापक विकास कार्य किए हैं।
उन्होंने कहा कि बीजेपी नितिन नवीन के कार्यों के आधार पर जनता से समर्थन मांगेगी और भारी मतों से उपचुनाव जीतेगी। सरावगी के अनुसार, पार्टी ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी 422 बूथों पर सात चरणों में चुनावी अभियान की रणनीति बनाई है। इसके तहत संगठन को मजबूत करने, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की बैठकों और जनसंपर्क अभियान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। चुनाव प्रचार को धार देने के लिए बिहार के विभिन्न जिलों से विधायकों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है।