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भरत तिवारी केस के बीच खुली 19 साल पुरानी फाइल, SDPO राजेश शर्मा से जुड़े कथित फर्जी एनकाउंटर पर 15 जुलाई को सुनवाई

भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में आरोपी एसडीपीओ राजेश शर्मा एक बार फिर 19 साल पुराने मुजफ्फरपुर के कथित फर्जी एनकाउंटर केस को लेकर चर्चा में हैं। वर्ष 2007 में हुई इस मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हुई थी। मृतकों के परिजनों ने सीआईडी जांच पर सवाल उठाते हुए 2013 में राजेश शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज कराया था।
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भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी DSP का ट्रांसफर

भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ मामले में आरोपी बनाए गए एसडीपीओ राजेश शर्मा एक बार फिर कथित फर्जी एनकाउंटर को लेकर चर्चा में हैं। मुजफ्फरपुर कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 15 जुलाई को होनी है। यह मामला करीब 19 साल पुराना है, लेकिन भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर के बाद इसकी फिर से चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, 19 साल पहले भी इस कथित एनकाउंटर को लेकर काफी विवाद हुआ था और उस समय राजेश शर्मा पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। मृतक के परिजनों ने सीआईडी जांच और चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए वर्ष 2013 में मुजफ्फरपुर कोर्ट में सदर थाने के तत्कालीन थानेदार राजेश शर्मा सहित चार थाना प्रभारी और कई अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। हालांकि, गवाहों के अभाव में यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित है। अब एक बार फिर इसके खुलने की संभावना जताई जा रही है।

15 जुलाई को कोर्ट में सुनवाई

कथित मुठभेड़ में मारे गए मनीष महिवाल की मां अनीता देवी ने न्यायालय में आवेदन दिया है। उनके पक्ष से मानवाधिकार आयोग के अधिवक्ता एस.के. झा ने अदालत में मामले की पुनः सुनवाई की मांग की है। इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए अदालत ने 15 जुलाई की तिथि निर्धारित की है। गौरतलब है कि इस मामले की सीआईडी जांच पर मानवाधिकार आयोग ने भी सवाल उठाए थे।

2007 की मुठभेड़ पर आज भी बरकरार हैं सवाल

यह मामला मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र का है। 4 नवंबर 2007 की सुबह करीब 4 बजे ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित एमआईटी कॉलेज के समीप पुलिस मुठभेड़ में तीन युवकों की मौत हो गई थी। मृतकों की पहचान सदर थाना क्षेत्र के लहलादपुर पताही निवासी मुकुल ठाकुर, काजी मोहम्मदपुर निवासी मनीष शर्मा और शिवहर जिले के धनकौल निवासी सुबोध कुमार सिंह के रूप में हुई थी।

इस मुठभेड़ को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामले की जांच सीआईडी को सौंपी गई थी। पुलिस का दावा था कि वाहन जांच के दौरान गाड़ी रोकने पर तीनों युवकों ने पुलिस पर 22 राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और तीनों की मौत हो गई।

हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को कथित फर्जी एनकाउंटर करार दिया था। वहीं, मनीष शर्मा की मां ने भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की गई।