पटना

Bankipur By Election: बांकीपुर में सियासी महासंग्राम, दांव पर भाजपा का गढ़ और प्रशांत किशोर की साख

Bankipur By Election बांकीपुर उपचुनाव भाजपा और जन सुराज के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। चुनाव प्रचार में प्रशांत किशोर परिवारवाद, विकास और एंटी-इंकंबेंसी को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। वहीं, भाजपा ने भी संगठन को सक्रिय कर बूथ स्तर तक चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं।
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Jul 06, 2026
नितिन नवीन- प्रशांत किशोर
नितिन नवीन- प्रशांत किशोर

Bankipur By Election: बिहार की राजनीति में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा और जन सुराज, दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। भाजपा के मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। यह चुनाव एक ओर भाजपा की संगठनात्मक ताकत और नितिन नवीन की राजनीतिक विरासत की परीक्षा है, तो दूसरी ओर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली हार के बाद प्रशांत किशोर के लिए अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने का बड़ा अवसर भी है।

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम बिहार की राजनीति की आगामी दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि भाजपा यह सीट बरकरार रखती है, तो इसे उसके मजबूत संगठन और जनाधार की जीत माना जाएगा। वहीं, अगर प्रशांत किशोर जीत दर्ज करते हैं, तो इसे उनकी राजनीति की बड़ी सफलता और विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण बढ़त के रूप में देखा जाएगा।

विरासत बनाम विकास की लड़ाई

बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले तीन दशकों से नितिन नवीन और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव रहा है। यही वजह है कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहे हैं। वह क्षेत्र की समस्याओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाते हैं कि एक ही परिवार ने इस सीट को अपनी राजनीतिक जागीर बना रखा है, जिसके कारण अपेक्षित विकास नहीं हो सका। प्रशांत किशोर अपने भाषणों में कहते हैं कि "नितिन नवीन नेता से विधायक, फिर मंत्री और अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। उनका राजनीतिक विकास तो हुआ, लेकिन बांकीपुर का कितना विकास हुआ, इस पर जनता को विचार करना चाहिए।" नितिन नवीन इस सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे हैं। उनसे पहले उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद भी चार बार बांकीपुर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसी आधार पर प्रशांत किशोर नितिन नवीन और भाजपा को घेरते हुए कई सवाल उठा रहे हैं। जन सुराज स्थानीय स्तर पर कथित असंतोष और एंटी-इंकंबेंसी को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के कार्यकर्ता भी नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए मतदाताओं तक यही संदेश पहुंचाने में जुटे हैं।

महागठबंधन के समर्थन पर पीके ने साधी चुप्पी

सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर इस उपचुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए महागठबंधन से भी समर्थन की कोशिश कर रहे हैं। उनकी रणनीति इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के बजाय भाजपा और जन सुराज के बीच सीधी टक्कर में बदलने की बताई जा रही है। इसी वजह से तेजस्वी यादव और कांग्रेस से समर्थन को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, जब प्रशांत किशोर से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए कहा, "मैंने बांकीपुर के चार लाख मतदाताओं से समर्थन मांगा है। भाजपा के लोगों से भी समर्थन मांगा है।" इस तरह उन्होंने महागठबंधन के समर्थन से जुड़े सवाल पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

गढ़ बचाने की तैयारी में बीजेपी

उधर, प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा के बाद भाजपा ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान नहीं किया है, लेकिन संगठन स्तर पर चुनावी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया है। चुनावी रणनीति को धार देने के लिए कई वरिष्ठ विधायकों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। बूथ से लेकर प्रखंड स्तर तक मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी रविवार को नीतीश कुमार से मुलाकात कर चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। वहीं, स्थानीय नेताओं ने नुक्कड़ सभाओं और जनसंपर्क अभियान की शुरुआत कर दी है। बांकीपुर में नितिन नवीन का व्यक्तिगत प्रभाव और भाजपा का बूथ स्तर तक मजबूत संगठन पार्टी की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती वोटों में तब्दील हो पाएगी।

Updated on:
06 Jul 2026 09:49 am
Published on:
06 Jul 2026 09:40 am