
Bankipur Seat: बांकीपुर विधानसभा सीट पर अपना किला बचाने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी है। इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना है, जहां बीजेपी, जन सुराज और आरजेडी के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। सूत्रों के अनुसार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन स्वयं चुनावी मोर्चा संभालेंगे। इसे लेकर पार्टी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। विधानसभा क्षेत्र के सभी 24 वार्डों और 422 बूथों पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई है, ताकि बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत रखा जा सके। जन सुराज की नेता विनीता मिश्रा भी मानती हैं कि बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत बूथ नेटवर्क है। उनका कहना है, "बीजेपी के हर बूथ पर सक्रिय कार्यकर्ता हैं, जो उसकी सबसे बड़ी ताकत है। वहीं, हमारी पार्टी के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती है।"
विनीता मिश्रा से जब पूछा गया कि यदि बीजेपी का संगठन इतना मजबूत है, तो फिर प्रशांत किशोर ने बांकीपुर से चुनाव लड़ने का फैसला क्यों किया? इस पर उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि पूरा चुनावी माहौल बीजेपी के पक्ष में ही है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने जिस उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, उसकी तुलना में प्रशांत किशोर कहीं अधिक शिक्षित और अनुभवी हैं। विनीता मिश्रा ने कहा, "प्रशांत किशोर के पास बांकीपुर के विकास का स्पष्ट विजन और ठोस रोडमैप है, जबकि बीजेपी के पास क्षेत्र के विकास को लेकर कोई नई योजना या स्पष्ट खाका नहीं है। हम मतदाताओं के बीच जाकर यही बात समझाने का प्रयास कर रहे हैं।"
पटना का शहरी क्षेत्र लंबे समय से बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। बिहार में लालू प्रसाद और राबड़ी देवी की सरकार के दौर में भी इस क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा कायम रहा। परिसीमन से पहले बांकीपुर विधानसभा सीट को पटना पश्चिम के नाम से जाना जाता था। वर्ष 2009 के परिसीमन के बाद 2010 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुआ, लेकिन इस क्षेत्र से बीजेपी का जीत का सिलसिला 1990 से लगातार जारी है। इसी वजह से बांकीपुर को बीजेपी का अभेद्य किला माना जाता है। हालांकि, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के खुद चुनावी मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब दोनों पक्ष जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं।