
Bankipur By Election बांकीपुर विधानसभा सीट, नितिन नवीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हाईप्रोफाइल व ‘VIP’ सीट बन गई है। इस सीट पर पिछले करीब 30 वर्षों से नितिन नवीन और उनके परिवार का दबदबा रहा है। यही वजह है कि बांकीपुर को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। हालांकि, नितिन नवीन के इस सीट से इस्तीफा देने के बाद प्रशांत किशोर की संभावित एंट्री ने यहां का सियासी पारा बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर खुद इस सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसे लेकर वे लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। उनकी टीम और पार्टी पदाधिकारी मोहल्लों में बैठकें कर लोगों से फीडबैक ले रहे हैं और चुनावी रणनीति पर मंथन कर रहे हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, बांकीपुर विधानसभा सीट पर कुल 3,79,420 मतदाता हैं।
नितिन नवीन की जगह बीजेपी के नए स्थानीय उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और संभावित एंटी-इन्कंबेंसी (नाराजगी) को प्रशांत किशोर की टीम अपने लिए अवसर के तौर पर देख रही है। जन सुराज को उम्मीद है कि इसका चुनावी फायदा मिल सकता है। इसके साथ ही बांकीपुर में 18 से 34 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1.10 लाख से अधिक युवा मतदाता हैं। ‘बिहार में रोजगार’ और ‘भविष्य के बदलाव’ वाले नैरेटिव के जरिए प्रशांत किशोर की टीम को भरोसा है कि वह युवाओं के साथ-साथ बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में भी 20 से 25 फीसदी तक सेंध लगा सकती है। पार्टी इसी मुद्दे को क्षेत्र में जोर-शोर से प्रचारित कर रही है। यही वजह है कि पीके की टीम लगातार महिलाओं और युवाओं के साथ बैठकें कर माहौल बनाने और मुकाबले को बराबरी पर लाने की कोशिश में जुटी है।
सूत्रों के मुताबिक, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रशांत किशोर को महागठबंधन के अप्रत्यक्ष समर्थन की भी उम्मीद है। इसे लेकर अंदरखाने बातचीत होने की चर्चा है। महागठबंधन को भी इस बात का एहसास है कि इस सीट पर उसके लिए जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में अगर महागठबंधन प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जन सुराज का समर्थन करता है, तो उसके पारंपरिक करीब 30 फीसदी वोट बैंक का फायदा प्रशांत किशोर की पार्टी को मिल सकता है। ऐसी स्थिति में बांकीपुर का मुकाबला काफी रोचक और कांटे का हो सकता है।
बांकीपुर विधानसभा पूरी तरह पटना नगर निगम के शहरी वार्डों में फैली सीट है। यहां के मतदाता देश के समसामयिक मुद्दों, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति से काफी प्रभावित माने जाते हैं। प्रशांत किशोर और उनकी टीम इस सीट पर एक अलग राजनीतिक प्रयोग करने की कोशिश में जुटी है। पीके की रणनीति बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण और वैश्य (व्यापारी वर्ग)—के बीच महंगाई और केंद्र सरकार की नीतियों को मुद्दा बनाकर सेंधमारी करने की है। इसके साथ ही महागठबंधन के संभावित समर्थन और सोशल इंजीनियरिंग (M-Y समीकरण) के सहारे चुनाव को सीधी और कांटे की टक्कर में बदलने की कोशिश की जा रही है।