
राजद नेता तेजस्वी यादव (फोटो- tejashwi yadav X)
Bankipur Seat: आरजेडी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री नीतीश मिश्रा का जिक्र करते हुए बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। पार्टी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के पूर्व भाजपा प्रत्याशी अभिषेक बंटी का उल्लेख करते हुए आरजेडी ने सवाल उठाया कि एक ही आरोप के आधार पर किसी व्यक्ति को मंत्री पद दिया जा सकता है, तो दूसरे को नामांकन के बाद चुनाव मैदान से हटने के लिए दबाव कैसे बनाया जा सकता है।
पोस्ट में आरजेडी ने कहा कि जिस चारा घोटाले से जुड़े आरोपों का हवाला देकर बीजेपी ने अभिषेक बंटी को चुनाव मैदान से हटाया, उसी मामले के आरोपी रहे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा वर्तमान एनडीए सरकार में दो विभागों के मंत्री हैं। इसे लेकर पार्टी ने बीजेपी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। आरजेडी ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी की यह पूरी रणनीति बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर को 'वॉकओवर' देने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है।
पार्टी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आगे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। पोस्ट में दावा किया गया कि वह शिक्षा में फर्जीवाड़े और हत्या के एक मामले में आरोपी हैं। इसके साथ ही आरजेडी ने पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का भी जिक्र करते हुए कहा कि उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप और वीडियो सामने आने की बातें कही जाती रही हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि बीजेपी ने अभिषेक बंटी का टिकट नैतिकता के आधार पर काटा है, तो अन्य नेताओं के मामले में वह अलग मानदंड क्यों अपना रही है।
आरजेडी ने प्रशांत किशोर का भी उल्लेख करते हुए बीजेपी पर तंज कसा। पार्टी ने दावा किया कि बीजेपी ने जानबूझकर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में कमजोर उम्मीदवार उतारा है, ताकि प्रशांत किशोर को 'वॉकओवर' मिल सके। पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि बांकीपुर की जनता इस पूरी रणनीति को समझ रही है और उपचुनाव में राजद की जीत सुनिश्चित है।
दस्तावेजों के अनुसार, बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी अभिषेक सिन्हा के पिता रविन्द्र प्रसाद का नाम चारा घोटाला मामले में एक निजी सप्लायर के रूप में दर्ज था। वह पटना स्थित एम/एस मगध केमिकल कॉर्पोरेशन में मैनेजर थे। उपलब्ध न्यायिक दस्तावेजों के मुताबिक, रविन्द्र प्रसाद उन निजी सप्लायरों में शामिल थे, जिन पर वास्तविक आपूर्ति किए बिना फर्जी बिलों के जरिए सरकारी राशि प्राप्त करने का आरोप सिद्ध हुआ था। इसी मामले में अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया था।
Updated on:
11 Jul 2026 04:15 pm
Published on:
11 Jul 2026 04:13 pm
