
बांकीपुर से भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा। (फोटो- ANI)
Bankipur By Election: बीजेपी ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपना प्रत्याशी बदल दिया है। हालांकि, इस बदलाव की भनक आरजेडी को पहले कैसे लग गई, इसे लेकर बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, अभिषेक बंटी को बीजेपी उम्मीदवार बनाए जाने के बाद आरजेडी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर दावा किया था कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में राजद प्रत्याशी के नामांकन के बाद बीजेपी खेमे में बेचैनी बढ़ गई है। संभावित हार को देखते हुए बीजेपी अपने प्रत्याशी का नामांकन वापस कराने पर विचार कर रही है।
आरजेडी के इस पोस्ट के कुछ ही देर बाद बीजेपी ने अभिषेक बंटी की जगह नीरज सिन्हा को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद आरजेडी ने फिर एक पोस्ट कर बीजेपी पर हमला बोला। पार्टी ने दावा किया कि उसने पहले ही बता दिया था कि संभावित हार के डर से बीजेपी अपने प्रत्याशी का नामांकन वापस कराकर ऐसा उम्मीदवार उतारेगी, जो बीजेपी की 'बी टीम' को फायदा पहुंचाएगा। आरजेडी ने यह भी कहा कि महागठबंधन ने बीजेपी और उसकी 'बी टीम' के सामने चुनौती खड़ी कर दी है और बांकीपुर उपचुनाव में उसकी जीत तय है।
आरजेडी के इस ट्वीट के कुछ ही देर बाद बीजेपी के नए प्रत्याशी नीरज सिन्हा से जुड़ा एक विवाद सामने आ गया। भारतीय जनता पार्टी की ओर से मीडिया को उपलब्ध कराए गए नीरज सिन्हा के बायोडाटा के अनुसार, वह वर्ष 2006 से पार्टी के प्राथमिक सदस्य हैं। हालांकि, इसी बायोडाटा में दी गई जानकारी के मुताबिक उस समय नीरज सिन्हा की उम्र महज 12 साल थी।
बीजेपी के संविधान के अनुसार, पार्टी की प्राथमिक सदस्यता लेने के लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। ऐसे में विपक्ष सवाल उठा रहा है कि वर्ष 1994 में जन्मे नीरज सिन्हा 2006 में ही पार्टी के प्राथमिक सदस्य कैसे बन गए। विपक्ष का आरोप है कि यह पार्टी के नियमों के खिलाफ है।
कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने इस मामले पर कहा कि बीजेपी चुनाव में हार के डर से ऐसी गलतियां कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी को पता है कि वह बांकीपुर विधानसभा चुनाव हारने जा रही है, इसलिए आनन-फानन में फैसले लिए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा नेता फिलहाल इस मुद्दे पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर इसे एक चूक के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि नीरज को पुराना कार्यकर्ता साबित करने की कोशिश में यह गलती हुई। 2006 में पार्टी की सदस्यता दिखाने से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि वह करीब 20 साल से बीजेपी से जुड़े हैं, लेकिन अब यही रणनीति पार्टी के लिए बैकफायर करती नजर आ रही है।
Updated on:
11 Jul 2026 10:29 am
Published on:
11 Jul 2026 10:24 am
