पटना

Bengal Chunav: बंगाल चुनाव से पहले BJP का मास्टर स्ट्रोक! नितिन नबीन के जरिए ‘भद्रलोक’ को साधने की रणनीति

बीजेपी द्वारा नितिन नवीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने को बंगाल में होने वाले चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है।
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Dec 15, 2025
BJP National President
भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन (फोटो- फेसबुक)

Bengal Chunav: पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी ने नितिन नवीन को कार्यकारी अध्यक्ष की नई जिम्मेदारी देकर बंगाल में चुनावी शुरुआत कर दी है। सीनियर पत्रकार प्रवीण बागी इसे बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक मानते हैं। उनका कहना है कि देश भर में कायस्थों की जनसंख्या लगभग 2.5‑3 करोड़ है, यानी कुल जनसंख्या का 2‑2.5 %। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या अन्य जातियों से कम है, पर राजनीति में इनका बड़ा प्रभाव है।

बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी ने यह फैसला क्यों लिया?

पश्चिम बंगाल में कायस्थों की कुल आबादी 27 लाख से अधिक है, जो बंगाल के अधिकांश हिस्सों में फैले हुए हैं। बंगाल में इन्हें घोष, बोस, दत्ता, गुहा और अन्य उपनामों से जाना जाता है। कायस्थ समुदाय बंगाल में काफी प्रभावशाली है और राजनीति में भी सक्रिय है।

प्रवीण बागी कहते हैं कि बंगाल में ये संख्या के हिसाब से उतने प्रभावी नहीं हैं, लेकिन ये मतदाताओं को प्रेरित (motivate) करने में अहम भूमिका निभाते हैं। लंबे समय तक बंगाल के विभिन्न अखबारों में रहे सीनियर पत्रकार ओम प्रकाश अश्क कहते हैं कि बंगाल चुनाव में कायस्थ और ब्राह्मणों की बड़ी भूमिका है। इन दोनों वर्गों का समाज में काफी पकड़ है और इनकी बातों पर लोग विश्वास करते हैं।

नितिन नबीन को बीजेपी ने नई जिम्मेदारी देकर इन दोनों वर्गों को साधने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि बीजेपी ने पहले ही मंगल पांडेय को प्रदेश का प्रभारी और सुवेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष बनाकर ब्राह्मणों को गोलबंद करने का प्रयास किया है।

दो हिस्सों में बंटा है बंगाल

बंगाल दो हिस्सों में बँटा हुआ है। एक ओर ब्राह्मण, कायस्थ, वैद्य जैसी उच्च जातियों का, और दूसरी ओर दलित‑आदिवासी समुदाय। ब्राह्मण, कायस्थ, वैद्य को बंगाल में ‘भद्रलोक’ कहा जाता है। नितिन नबीन की नई जिम्मेदारी पर ‘भद्रलोक’ में चर्चा शुरू हो गई है, विशेषकर कायस्थ समुदाय की चुनावी भूमिका को लेकर।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नितिन नबीन जैसे नेता को राष्ट्रीय नेतृत्व में लाना भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी बंगाल में शिक्षित मध्यम वर्ग, शहरी मतदाता और भद्रलोक को अपने साथ जोड़ सके। साथ ही संगठनात्मक मजबूती और कैडर‑आधारित राजनीति पर भी जोर दिया जा रहा है।

कितना पड़ेगा असर

बीजेपी ने नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है, और इसका असर समय के साथ ही स्पष्ट होगा। बंगाल चुनाव में, विशेषकर भद्रलोक और कायस्थ समुदाय में इसका संभावित प्रभाव जरूर महसूस किया जाएगा। ओम प्रकाश अश्क कहते हैं कि आने वाले महीनों में यह पता चलेगा कि यह फैसला केवल संगठनात्मक मजबूती तक सीमित है या बंगाल की चुनावी राजनीति में वास्तविक बदलाव लाता है।

Updated on:
15 Dec 2025 05:21 pm
Published on:
15 Dec 2025 03:11 pm