
भरत भूषण तिवारी के श्राद्धकर्म के बाद भोजपुर पुलिस ने एनकाउंटर मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े पुराने पहलुओं की गंभीरता से पड़ताल कर रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस भरत भूषण तिवारी के गांव बिलौटी के कुछ लोगों को विश्वास में लेकर जांच को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पुलिस अपनी रिपोर्ट में गांव के लोगों से उनके विवाद, मारपीट और धमकी जैसे मामलों को रिकॉर्ड में शामिल करना चाहती है, ताकि कार्रवाई को मजबूत आधार दिया जा सके। हालांकि, अभी तक पुलिस को इस मामले में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। फिलहाल पुलिस के पास वर्ष 2025 में शाहपुर थाने के दारोगा रामाशंकर बैठा द्वारा दर्ज कराया गया एफआईआर ही मुख्य आधार के रूप में मौजूद है।
शाहपुर थाने के दारोगा रामाशंकर बैठा द्वारा पिछले वर्ष 24 मार्च 2025 को एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एफआईआर के अनुसार, जमीन विवाद से संबंधित दस्तावेज मांगने पर भरत भूषण तिवारी ने मौके पर मौजूद दारोगा रामाशंकर बैठा का कॉलर पकड़ लिया और उनके साथ धक्का-मुक्की की।
एफआईआर में दो पुलिसकर्मियों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में शाहपुर थाना में भरत भूषण तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा, पुलिस रिकॉर्ड में भरत भूषण तिवारी के खिलाफ अभी तक कोई अन्य मामला दर्ज नहीं पाया गया है। पुलिस अब इसी एफआईआर को आधार बनाकर उनसे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर के बाद आक्रोशित भीड़ द्वारा किए गए तोड़फोड़ मामले में पुलिस ने उनके परिवार के लोगों के नाम मामले से हटा दिए हैं। हालांकि, गांव के अन्य लोगों के नाम अभी भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं।
इस पर गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस इस तरह की कार्रवाई कर गांव में फूट डालने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि यह “फूट डालो और राज करो” की नीति के तहत किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि वे इससे डरने वाले नहीं हैं और जब तक भरत भूषण तिवारी को न्याय नहीं मिल जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
भरत भूषण तिवारी को न्याय दिलाने के लिए बुधवार से पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की गई है। इसको लेकर पंकज त्रिपाठी ने बताया कि भरत भूषण तिवारी के श्राद्धकर्म के दौरान आयोजित महापंचायत में शामिल पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया है कि इस आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जो लोग भरत भूषण तिवारी के कार्यों का समर्थन करते हैं और पुलिस के एनकाउंटर को फर्जी मानते हैं, उनसे हस्ताक्षर लिए जाएंगे। इस अभियान के माध्यम से आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।