
भरत तिवारी (फोटो- bharat tiwari facebook)
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद मृतक के भाई चंदन तिवारी ने कहा है कि परिवार अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
चंदन तिवारी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरा परिवार चाहता है कि मामले की जांच सीआईडी के बजाय सीबीआई से कराई जाए, ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित हो सके। भरत तिवारी के ब्रह्मभोज में आज करीब 20 से 25 हजार लोग शामिल हुए। परिवार की ओर से इसकी पूरी तैयारी की गई थी। कुछ लोगों ने भी इस आयोजन में सहयोग किया है।
भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद कई आंदोलनकारी संगठनों ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। इस मुद्दे पर भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव बिलौटी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की घोषणा की गई।
महापंचायत से जुड़े पंकज त्रिपाठी ने बताया कि संगठन ने पहले प्रशासन को 30 तारीख तक का समय दिया था, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से किसी ठोस कार्रवाई या न्याय का संकेत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि पहले आंदोलनकारी संगठनों ने मानसून सत्र के दौरान बिहार विधानसभा का घेराव करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब रणनीति में बदलाव करते हुए इस मुद्दे को सीधे दिल्ली तक ले जाने का फैसला किया गया है।
त्रिपाठी ने घोषणा की कि 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी, जो भरत तिवारी की पुण्यतिथि का दिन है। इसके अलावा आज से गांवों और शहरों में एक राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जा रहा है। जिसके जरिए न्याय की मांग के लिए इकट्ठा की गई याचिकाओं को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील और 'वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा' के अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने घटना को लेकर पुलिस के दावों पर सवाल उठाए। किसी भी तरह की प्रशासनिक जांच को खारिज करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी जांच का मकसद केवल मामले को टालना और जनता का ध्यान भटकाना होता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक मिसालें और व्यावहारिक अनुभव दोनों ही यह दिखाते हैं कि ऐसी जांच की कोई खास कानूनी भूमिका नहीं होती है।
पुलिस पर आरोप लगाते हुए वकील अनिल मिश्रा ने कहा कि वीडियो फुटेज और आसपास की परिस्थितियों की जांच से साफ पता चलता है कि भरत तिवारी से पहले सरेंडर करवाया गया, घेराबंदी करके उसे पकड़ा गया और फिर उसे तीन गोलियां मारी गईं। इसके बाद भी, जब मनचाहा नतीजा नहीं मिला, तो उसे पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर दो और गोलियां मारी गईं। अनिल मिश्र ने इस घटना को ब्रूटल मर्डर बताया।
Updated on:
30 Jun 2026 08:44 pm
Published on:
30 Jun 2026 08:43 pm
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