
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा और भरत तिवारी
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर के मामले में एक नया मोड़ आया है। CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद कई आंदोलनकारी संगठनों ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है। भोजपुर ज़िले के बिलौटी गांव में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्याय के लिए आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की घोषणा की गई।
महापंचायत से जुड़े पंकज त्रिपाठी ने बताया कि संगठन ने पहले प्रशासन को 30 तारीख तक की समय-सीमा दी थी। हालांकि, समय-सीमा बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई या न्याय का कोई संकेत नहीं मिला है। जहां आंदोलनकारी संगठनों ने शुरू में मॉनसून सत्र के दौरान बिहार विधानसभा का घेराव करने की योजना बनाई थी, वहीं अब उन्होंने अपनी रणनीति बदल दी है और अपनी मांग को सीधे दिल्ली ले जाने का फैसला किया है।
त्रिपाठी ने घोषणा की कि 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी, जो भरत तिवारी की पुण्यतिथि का दिन है। इसके अलावा आज से गांवों और शहरों में एक राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जा रहा है। जिसके जरिए न्याय की मांग के लिए इकट्ठा की गई याचिकाओं को प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के वकील और 'वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा' के अध्यक्ष अनिल मिश्रा ने घटना को लेकर पुलिस के दावों पर सवाल उठाए। किसी भी तरह की प्रशासनिक जांच को खारिज करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी जांच का मकसद केवल मामले को टालना और जनता का ध्यान भटकाना होता है। उन्होंने कहा कि न्यायिक मिसालें और व्यावहारिक अनुभव दोनों ही यह दिखाते हैं कि ऐसी जांच की कोई खास कानूनी भूमिका नहीं होती है।
पुलिस पर आरोप लगाते हुए वकील अनिल मिश्रा ने कहा कि वीडियो फुटेज और आसपास की परिस्थितियों की जांच से साफ पता चलता है कि भरत तिवारी से पहले सरेंडर करवाया गया, घेराबंदी करके उसे पकड़ा गया और फिर उसे तीन गोलियां मारी गईं। इसके बाद भी, जब मनचाहा नतीजा नहीं मिला, तो उसे पुलिस की गाड़ी में बिठाया गया और वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश पर दो और गोलियां मारी गईं। अनिल मिश्र ने इस घटना को ब्रूटल मर्डर बताया।
अनिल मिश्रा ने कहा कि इस मामले में आरोपियों को बचाने के लिए सेल्फ डिफेंस की कहानी गढ़ी गई है और एफआईआर में हत्या की मूल धारा (पुरानी आईपीसी की धारा 302) को शामिल नहीं किया गया है, जो यहां साफ तौर पर लागू होता है। उन्होंने मांग की कि एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए और उनका तबादला जिला मुख्यालय से बाहर किसी जगह पर किया जाए, ताकि वे जांच को प्रभावित न कर सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी रात में गवाहों, ग्रामीणों और भरत तिवारी के परिवार वालों को डराने-धमकाने के लिए आ रहे हैं, ऐसी हरकतें किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।
महापंचायत से जुड़े पंकज त्रिपाठी ने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। संगठन का उन बाहरी लोगों से कोई लेना-देना नहीं है जो आंदोलन को पटरी से उतारने की कोशिश में पुलिस प्रशासन को खुलेआम धमकी दे रहे हैं या अपशब्द कह रहे हैं। इस संघर्ष को सुचारू रूप से चलाने के लिए 21 वकीलों की एक विशेष समिति बनाई गई है, अनिल मिश्रा इसके अध्यक्ष हैं, पंकज त्रिपाठी संयोजक हैं और भरत तिवारी के पिता श्री काशीनाथ तिवारी सभी समितियों के सह-संयोजक हैं।
Published on:
30 Jun 2026 07:02 pm
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