
Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की कथित एनकाउंटर में हत्या से न केवल बिहार में बल्कि पूरे देश में गुस्सा है। इसी कड़ी में दिल्ली-एनसीआर के एक बाइकर्स ग्रुप का राइडर करीब 14 घंटे का लंबा सफर तय कर अपनी ₹20 लाख की महंगी हार्ले डेविडसन बाइक से सीधे मृतक भरत भूषण के गांव बिलौटी पहुंचा। दिल्ली से आए इस राइडर ने इस पूरी घटना को 100% फर्जी एनकाउंटर बताया और कहा कि वह सिर्फ दुख जताने नहीं, बल्कि भरत तिवारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई में शामिल होने आए हैं।
दिल्ली-एनसीआर के बाइक राइडर्स ग्रुप 'थ्रोटल क्लब' के सदस्य राजेश अपनी हार्ले डेविडसन स्ट्रीट रॉड बाइक के साथ भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचे। दिल्ली से बिहार के इस सफर के बारे में बताते हुए राजेश ने कहा कि वे रास्ते में एक्सप्रेस-वे और हाईवे के जरिए तकरीबन 13 से 14 घंटे लगातार बाइक ड्राइव कर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि वे पिछले एक हफ्ते से सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले को लगातार ट्रैक कर रहे थे और उनके भीतर के इंसान ने उन्हें घर पर बैठने नहीं दिया।
ग्रामीणों के बीच राजेश ने बिहार पुलिस की एनकाउंटर थ्योरी पर कहा, "भाई को जस्टिस मिलना ही चाहिए। यह एनकाउंटर पूरी तरह से फर्जी है। अगर कोई भी बंदा पुलिस के सामने सरेंडर कर रहा है, तब भी आप उसे खेत में ले जाकर मार दे रहे हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस तैयारी के साथ घर को चारों तरफ से घेरकर मूड बनाकर आए थे।"
भरत भूषण द्वारा की गई फायरिंग के दावों पर युवक ने कहा, "उन्होंने पुलिस को डराने के लिए इधर-उधर हवाई फायरिंग की थी, उनका मोटिव पुलिस पर जानबूझकर निशाना साधना या किसी की जान लेना नहीं था। वे फेसबुक लाइव थे इसलिए उस वक्त बच गए, नहीं तो पुलिस पहले ही उनका गेम ओवर कर देती।"
भरत भूषण तिवारी को मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जाने वाली थ्योरी पर राजेश ने कहा, "अगर वो मेंटली डिस्टर्ब थे, तो कानूनन उनका मेडिकल इलाज होना चाहिए था। जब तुम किसी को पागल बोलकर भी एनकाउंटर कर रहे हो, तो ऐसे तो देश की सड़कों पर न जाने कितने पागल घूम रहे हैं, क्या बिहार पुलिस हर किसी का एनकाउंटर करती फिरेगी? क्या बिहार में अब पागलों का एनकाउंटर होगा?"
राजेश ने आगे कहा कि भरत भूषण कोई गुंडा या माफिया नहीं थे। वे पिछले 5-6 महीने से उनका सोशल मीडिया प्रोफाइल और ब्लॉग देख रहे हैं। वे क्षेत्र के विकास, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और बाढ़ पीड़ितों के हक के लिए लड़ रहे थे। इसी वजह से इस क्षेत्र के लोगों ने उन्हें 'भगत सिंह' की उपाधि दी है। इंसान हर किसी का एनकाउंटर होने पर उसे भगत सिंह नहीं कहता।
राजेश ने कहा कि इस मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को महज 3-4 महीने के लिए निलंबित करना कोई इंसाफ नहीं है। सस्पेंशन के बाद वे दोबारा ड्यूटी जॉइन करेंगे और फिर किसी बेकसूर के साथ यही काम करेंगे। इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिस अधिकारियों को सीधे फांसी या फिर आजीवन कारावास की सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज देश की मीडिया इस मुद्दे को इतनी मुस्तैदी से नहीं उठाती, तो सरकार और सिस्टम इस पूरे मामले को कब का दबा चुके होते। अब यह लड़ाई सिर्फ बिलौटी गांव की नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के इंसाफ की जंग बन चुकी है।