
जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष RCP सिंह
Bihar Politics: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद सहयोगी और जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री रामचंद्र प्रसाद सिंह (RCP सिंह) शनिवार को अचानक नीतीश कुमार से मिलने उनके आवास पर पहुंचे। इस दौरे के बाद नीतीश आवास के बाहर आरसीपी सिंह के समर्थकों ने जबरदस्त हंगामा और नारेबाजी की। समर्थकों का सीधा आरोप है कि पार्टी के ही कुछ विधान पार्षदों ने एक साजिश के तहत आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार से ठीक से मिलने और बात करने से रोक दिया। हालांकि, RCP सिंह ने कहा कि मुलाकात आत्मीय थी। इस मुलाकत के बाद एक बार फिर से RCP सिंह की जदयू में वापसी की अटकलें लगने लगी हैं।
जानकारी के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह शनिवार सुबह करीब 20-25 समर्थकों के साथ अचानक पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर पहुंचे। इसी दौरान, जब नीतीश कुमार अपने कमरे से बाहर निकले, तो उन्होंने आरसीपी सिंह को वहां बैठे देखा। नीतीश कुमार को देखते ही आरसीपी सिंह तुरंत खड़े हो गए और सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। हालांकि, नीतीश कुमार ने एक आम कार्यकर्ता की तरह महज इशारों में ही प्रणाम का जवाब दिया ।
इस मुलाकात को लेर RCP सिंह सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "आज बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद, हमारे नेता आदरणीय नीतीश बाबू से भेंट हुई। उनसे बातचीत हुई। मुलाकात बहुत आत्मीय रही। आज सुबह नीतीश जी से मेरी बातचीत हुई है।"
इधर, RCP सिंह के समर्थकों ने आरोप लगाया कि JDU MLC संजय गांधी और विधान पार्षद ललन सराफ ने जानबूझकर साजिश रची और RCP सिंह को नीतीश कुमार से मिलने नहीं दिया। मुलाकात न होने से नाराज और आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नीतीश आवास के बाहर ही एमएलसी संजय गांधी और ललन सराफ के खिलाफ नारेबाजी की।
RCP सिंह की JDU में वापसी की अटकलें मुख्य रूप से जनवरी 2026 में हुए कुछ सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण शुरू हुईं। 11 जनवरी 2026 को एक कार्यक्रम में नीतीश कुमार और RCP सिंह, दोनों शामिल हुए। इस कार्यक्रम के बाद में RCP सिंह ने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया था और उनकी नीतियों की तारीफ की थी। जब RCP से JDU में वापसी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने जल्द पता लगने की बात कही थी।
RCP सिंह को पार्टी से इसलिए निकाला गया क्योंकि केंद्रीय मंत्री के तौर पर उनकी नियुक्ति को लेकर विवाद हुआ था और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनके रिश्ते में दरार आ गई थी। 2021 में केंद्रीय कैबिनेट विस्तार के दौरान नीतीश कुमार 2 मंत्री पद चाहते थे। लेकिन, RCP सिंह ने नीतीश कुमार की सहमति के बिना केंद्रीय इस्पात मंत्री के तौर पर शपथ ले ली। इस कदम को नीतीश कुमार की इच्छा के खिलाफ माना गया।
नतीजतन, नीतीश कुमार ने 2022 में RCP सिंह को राज्यसभा के लिए नॉमिनेट नहीं किया, जिससे उन्हें केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके कुछ ही समय बाद जदयू ने उन पर भ्रष्टाचार और गैर-कानूनी संपत्ति जमा करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए। उनके रिश्तों में कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि आखिरकार RCP सिंह को पार्टी छोड़नी पड़ी।
Updated on:
27 Jun 2026 11:06 am
Published on:
27 Jun 2026 11:04 am
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