पटना

भोजपुर में बहुजन महापंचायत पर संकट! स्कूल ने ग्राउंड देने से किया इनकार, सियासी तापमान बढ़ा

Bahujan mahapanchayat: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के मुद्दे पर 5 जुलाई को आरा में प्रस्तावित बहुजन महापंचायत संकट में पड़ गई है। विद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए स्कूल का मैदान देने से इनकार कर दिया है।
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Jul 01, 2026
bahujan mahapanchayat postponed
फोटो -(AI Generated)

Bahujan mahapanchayat: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर 24 जून को बिलौटी में आयोजित महापंचायत के जवाब में 5 जुलाई को बिहार के आरा में प्रस्तावित बहुजन महापंचायत पर संकट गहरा गया है। विद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम के लिए स्कूल का मैदान उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। इसके बाद महापंचायत के आयोजन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं और राज्य की सियासत भी गरमा गई है। इधर, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अपना रुख बदलते हुए अब महापंचायत के आयोजकों से फिलहाल कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की है। मांझी ने पहले इस कार्यक्रम में शामिल होने का एलान किया था।

महापंचायत से जुड़े नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समर्थन में आयोजित किया जा रहा था। वहीं, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि इस आयोजन को लेकर भाजपा असहज थी। सूत्रों के अनुसार, महापंचायत के लिए जिस तरह की जातीय गोलबंदी की जा रही थी, उससे एनडीए के परंपरागत वोट बैंक में नाराजगी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बिहार में फिर जातीय गोलबंदी की चर्चा

प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को लेकर राज्य में संभावित जातीय तनाव की आशंकाओं पर भी चर्चा तेज हो गई थी। 5 जुलाई को आरा में प्रस्तावित इस महापंचायत को लेकर विभिन्न पक्षों की राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई थी। भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं और विधायकों के बीच भी अलग-अलग राय सामने आई, जिसके बाद दोनों पक्ष अपने-अपने पक्ष में माहौल बनाने में जुट गए। इसी बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हो गई कि बिहार में करीब दो दशक बाद एक बार फिर जातीय सम्मेलनों और सामाजिक गोलबंदी की राजनीति का दौर लौट सकता है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बिलौटी महापंचायत के जवाब में बहुजन महापंचायत

भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में कथित फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी के समर्थन में 24 जून को एक महापंचायत आयोजित की गई थी। महापंचायत में विपक्षी नेताओं और स्थानीय लोगों ने एनकाउंटर को कथित रूप से फर्जी बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और राज्य सरकार व प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। इस कार्यक्रम में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।

महापंचायत से सियासी गणित तेज

बहुजन महापंचायत को लेकर बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा था कि इस आयोजन के जरिए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनके समर्थक अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार, इस महापंचायत में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, नागमणि कुशवाहा, सकलदेव बिंद और भाजपा नेता प्रतिमा कुशवाहा के शामिल होना था। लेकिन, जीतन राम मांझी ने आज अपना रुख बदलते हुए महापंचायत के आयोजकों से फिलहाल कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की है।

जबकि उपेंद्र कुशवाहा ने इससे अपनी दूरी बना ली थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बहुजन महापंचायत सफल रहती है, तो इससे सम्राट चौधरी की राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि इसका असर भाजपा के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, महापंचायत को सफल बनाने के लिए एनडीए के पिछड़ा, अति पिछड़ा और दलित वर्ग से जुड़े कई नेता और कार्यकर्ता सक्रिय रूप से प्रचार-प्रसार में जुटे हुए हैं।

Updated on:
01 Jul 2026 10:18 pm
Published on:
01 Jul 2026 09:41 pm
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