
Bharat Tiwari Encounter: राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार के भोजपुर में हुए भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर सरकार और बिहार पुलिस पर हमला बोला है। पुलिस की कार्रवाई को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था और घटना के बारे में पुलिस के दावों पर सवाल उठाए हैं। विधायक ने आरोप लगाया है कि एनकाउंटर के नाम पर समाज के एक ख़ास वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
भाई वीरेंद्र ने पुलिस की मुठभेड़ वाली कहानी पर तंज कसते हुए कहा कि किसी को भी एनकाउंटर करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "यह अजीब बात हो गई है। पुलिस वाले अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर 10 की संख्या में रहते हैं और जिस व्यक्ति को अपराधी घोषित किया जाता है, उसके पास एक कट्टा रहता है। वह कट्टे वाला व्यक्ति इतनी भारी पुलिस फोर्स पर कैसे वार कर सकता है?"
राजद विधायक ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति समाज में आतंक फैलाता है या अपराध करता है, तो उसे सजा देने के लिए कानून और अदालतें बनी हैं, पुलिस को उसे सीधे गोली मारने का कोई अधिकार नहीं है। दोनों तरफ से अंधाधुंध गोली चलने की बात अलग है, लेकिन किसी को पकड़कर मारना सीधे तौर पर हत्या है।
विधायक भाई वीरेंद्र ने इस दौरान सरकार पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज के दौर में एनकाउंटर को भी जाति और वर्ग के चश्मे से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा, "जब सामाजिक न्याय के लोग यानी पिछड़े (बैकवर्ड) मारे जाते हैं, तो पुलिस कहती है कि वह बहुत बड़ा क्रिमिनल था। जब किसी अल्पसंख्यक का एनकाउंटर होता है, तो उसे आतंकवाद के कनेक्शन से जोड़ दिया जाता है। और जब किसी दलित की हत्या या एनकाउंटर होता है, तो कह दिया जाता है कि इसका संबंध नक्सलियों से है। यह बेहद आश्चर्य की बात है कि दूसरे रसूखदार लोगों का एनकाउंटर होने पर उन्हें शहीद का दर्जा देने की मांग होने लगती है।"
आरजेडी विधायक ने कहा कि कानून ने सरकार को भी किसी नागरिक की हत्या करने का अधिकार नहीं दिया है। सरकार को कानून के दायरे में रहकर काम करना चाहिए और अपराधियों को अदालत से सजा दिलानी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे खुद अपराधियों के खिलाफ हैं और अपराधी की कोई जाति नहीं होती, लेकिन आज कुछ राजनीतिक लोग इस मामले में एक विशेष जाति की हवा देकर अपनी रोटियां सेक रहे हैं।
देश की आजादी का जिक्र करते हुए भाई वीरेंद्र ने कहा कि इसे आजाद कराने में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबने शहादत दी थी, लेकिन आज कुछ लोग बेवजह हाय-तौबा मचा रहे हैं। भाई वीरेंद्र ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि भरत तिवारी समेत हाल के दिनों में हुए सभी एनकाउंटर मामलों की निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।