
Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिककर्ता से कहा कि हाई कोर्ट में अपील करें। इधर, भरत तिवारी की मां आशा तिवारी ने जिला प्रशासन और जगदीशपुर के SDM पर कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि भरत तिवारी को 1,400 करोड़ के घोटाले का पता चल गया था और इसी वजह से उसका मर्डर कर दिया गया।
भरत तिवारी की मां आशा तिवारी ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी की मौत किसी एनकाउंटर में नहीं हुई, बल्कि उसके द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की वजह से प्रशासन ने सोची-समझी साजिश के तहत उसका मर्डर कर दिया। आशा तिवारी ने कहा कि उनका बेटा जवनिया गांव में गरीबों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा था और समाज सेवा में सक्रिय रूप से लगा हुआ था।
भरत तिवारी की मां ने बताया कि जवनिया गांव में गरीबों के लिए घर बनाने और मिट्टी भरवाने के नाम पर घोटाला चल रहा था। उनके बेटे को इस 1400 करोड़ के घोटाले के बारे में पता चल गया था। इसी राज को बाहर आने से रोकने के लिए ही उसे रातसे से हटा दिया गया। आशा तिवारी ने मांग की है कि आरोपी अधिकारियों और इस साजिश में शामिल सभी लोगों को फांसी की सजा होनी चाहिए।
जब मां आशा तिवारी से पूछा गया कि क्या सरकार उन्हें कोई सुरक्षा दे रही है, तो आशा तिवारी ने कहा कि उन्हें प्रशासन और पुलिस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, सब विश्वासघाती हैं, क्योंकि जिन लोगों ने उनके बेटे को मारा, वे उन्हें भी मार सकते हैं। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर के बाद से परिवार के लोगों को लगातार फोन पर धमकियां मिल रही हैं। फोन करने वाले लोग कह रहे हैं कि भरत तिवारी के पूरे खानदान को खत्म कर दो और इसके मम्मी, पापा और भाइयों को मार डालो। भरत तिवारी की मां ने यह भी कहा कि सरकार की बोलती बंद हो गई है, वे सिर्फ गरीबों और कमजोरों पर लाठी चलाना और उन्हें जेल में डालना जानते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी की ओर से दायर इस याचिका में मांग की गई थी कि जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंपी जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे, क्योंकि स्थानीय पुलिस प्रशासन पर हत्या की साजिश रचने के आरोप लग रहे हैं। इसके अलावा, याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाने की भी मांग की गई थी, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें। ताकि जांच की निगरानी की जा सके और कानून-व्यवस्था में जनता का भरोसा बना रहे।