
भरत तिवारी और भाजपा नेता नागमणि कुशवाहा
Nagmani Kushwaha on Bharat Tiwari: बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर राज्य का राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। इसी बीच, पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नागमणि कुशवाहा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने मृतक भरत तिवारी की तुलना कुत्ते - बिल्ली से की है।
एक यूट्यूब चैनल से बातचीत के दौरान जब भरत तिवारी एनकाउंटर पर नागमणि कुशवाहा से की राय पूछी गई तो उन्होंने कहा, "आप लोग भरत तिवारी जैसे कुत्तों और बिल्लियों का नाम क्यों लेते हैं। वह एक अपराधी था और पुलिस की कानूनी कार्रवाई के दौरान मारा गया। इस पर और बहस करने की कोई जरूरत नहीं है।" आम जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस बयान की निंदा करते हुए इसे अशोभनीय और अमानवीय बताया है।
नागमणि कुशवाहा बिहार की राजनीति के एक अनुभवी और जाने-पहचाने चेहरे हैं। वह महान समाजवादी नेता और शोषितों की आवाज माने जाने वाले 'बिहार के लेनिन' शहीद जगदेव प्रसाद के बेटे हैं। नागमणि के नाम राजनीतिक इतिहास का अनोखा और दुर्लभ रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह उन गिने चुने व्यक्तियों में हैं, जो चारों विधायी सदनों लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा, वह अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री भी रह चुके हैं।
नागमणि का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अब तक कुल 14 बार पार्टियां बदलीं हैं, वह RJD, JDU, कांग्रेस, RLSP और BJP सहित लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं। अगस्त 2025 में वह अपनी पुरानी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) में फिर से शामिल हो गए और फिलहाल बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के करीबी रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
भरत तिवारी की तुलना कुत्ते-बिल्ली से करने वाली उनकी टिप्पणी के बाद, नागमणि कुशवाहा का एक पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर फिर से ट्रेंड करने लगा है। उस पुराने वीडियो में नागमणि कुशवाहा सनातन धर्म और भगवान राम पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं, "मैं भगवान राम को ईश्वर नहीं मानता। अगर राम सचमुच ईश्वर थे, तो वे एक आम इंसान की तरह कैसे मरे?"
17 जून को भोजपुर में हुए एनकाउंटर को लेकर बिहार पुलिस पर हर तरफ से भारी दबाव है। राज्य भर में कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पूर्व DGP अभयानंद जैसी जानी-मानी हस्तियों ने घटना के समय मजिस्ट्रेट की तैनाती को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों के अलावा, सत्ताधारी NDA गठबंधन के कई नेताओं और विधायकों ने भी पुलिस की कार्रवाई को संदिग्ध बताया है और उच्च-स्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग की है।
Published on:
29 Jun 2026 09:55 am
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