पटना

बिहार के ज़मीन मालिकों को बड़ी राहत: जून से वेबसाइट पर मिलेंगे पुराने डीड और रजिस्ट्री पेपर

बिहार के डिप्टी CM खुद प्रोग्रेस का रिव्यू कर रहे हैं, कड़े निर्देश जारी कर रहे हैं और ब्यूरोक्रेसी के अंदर से विरोध के बावजूद काम न करने वाले अधिकारियों का ट्रांसफर कर रहे हैं।
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Feb 15, 2026
Land settlement
Photo: AI generated

बिहार के लाखों ज़मीन मालिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म डिपार्टमेंट इस साल जून से अपनी ऑफिशियल वेबसाइट के ज़रिए रैयतों को पुराने लैंड डीड, रजिस्ट्री पेपर और उनसे जुड़े डॉक्यूमेंट सीधे डाउनलोड करने की
सुविधा देना शुरू कर देगा। रैयतों को इस सुविधा का लंबे समय से इंतज़ार था, इसके लिए रैयत को सर्कल ऑफिस का बार-बार चक्कर लगाना पड़ता था। इसमें 1990 के दशक के रिकॉर्ड शामिल होंगे और कई मामलों में तो उससे भी पहले के। इस कदम से ज़्यादातर मामलों में फिजिकल वेरिफिकेशन की ज़रूरत खत्म होने की उम्मीद है, जिससे पूरे राज्य में लैंड रिकॉर्ड तक पहुँच काफी आसान हो जाएगी।

पुराने डीड और रजिस्ट्री पेपर

यह कदम लैंड एडमिनिस्ट्रेशन में बड़े बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है, डिप्टी चीफ मिनिस्टर विजय कुमार सिन्हा,ने रेवेन्यू और लैंड रिफॉर्म पोर्टफोलियो मंत्रालाय मिलने के बाद ज़ोर-शोर से इसे आगे बढ़ाया है। चार्ज संभालने के बाद से, सिन्हा ने राज्य के उलझे हुए ज़मीन के झगड़ों को सुलझाना अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना लिया है, और अक्सर पुराने तरीकों के आदी सर्कल ऑफिसर और रेवेन्यू स्टाफ के विरोध को नज़रअंदाज़ कर दिया है।

ज़मीन के झगड़े क्राइम और हिंसा की बड़ी वजह

अधिकारियों ने माना कि ज़मीन के झगड़े राज्य में क्राइम और हिंसा की एक बड़ी वजह हैं, जो अक्सर हत्या, जातिगत झगड़ों और लंबे पारिवारिक झगड़ों में बदल जाते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई मौकों पर साफ़ तौर पर कहा है कि राज्य में लगभग 60% क्राइम ज़मीन के झगड़ों से जुड़े हैं, जिससे ट्रांसपेरेंट और आसानी से मिलने वाले रिकॉर्ड न सिर्फ़ एडमिनिस्ट्रेटिव एफिशिएंसी के लिए बल्कि सोशल टेंशन और क्रिमिनल घटनाओं को कम करने के लिए भी ज़रूरी हैं।

झगड़ों की जड़ नकली डॉक्यूमेंट

सिन्हा ने कहा कि डिपार्टमेंट तय डेडलाइन से पहले डाउनलोड मुमकिन बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डिप्टी CM खुद प्रोग्रेस का रिव्यू कर रहे हैं, कड़े निर्देश जारी कर रहे हैं और ब्यूरोक्रेसी के अंदर से विरोध के बावजूद काम न करने वाले अधिकारियों का ट्रांसफर कर रहे हैं। सिन्हा ने पब्लिक मीटिंग में बार-बार कहा है, “ज़्यादातर ज़मीन के झगड़ों की जड़ नकली डॉक्यूमेंट हैं,” और ज़ोर देकर कहा कि डिजिटाइज़ेशन और ट्रांसपेरेंसी ही इसका एकमात्र परमानेंट सॉल्यूशन है।

सर्वे रिकॉर्ड ऑनलाइन

नए सिस्टम के तहत, ज़मीन के मालिक खाता नंबर, प्लॉट नंबर और ज़िले जैसी बेसिक डिटेल्स डालकर 2006 से पहले के रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स और पुराने सर्वे रिकॉर्ड ऑनलाइन देख पाएंगे। 1990 से 2005 के बीच के रिकॉर्ड के लिए, चार करोड़ से ज़्यादा पेज पहले ही स्कैन किए जा चुके हैं, जबकि पुराने डॉक्यूमेंट्स को प्रायोरिटी दी जा रही है। एक बार लाइव होने के बाद, पोर्टल किसी भी पेंडिंग फीस का ऑनलाइन पेमेंट करने की भी इजाज़त देगा, और डॉक्यूमेंट्स मिनटों में डिजिटली डिलीवर हो जाएंगे।

म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के लिए टाइमलाइन

डिपार्टमेंट ने साथ ही म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) केस के लिए टाइमलाइन भी टाइट कर दी है। अधिकारियों को बिना विवाद वाले उत्तराधिकार या सेल-बेस्ड म्यूटेशन का म्यूटेशन एक हफ़्ते के अंदर निपटाने के लिए कहा गया है। विवादित केस में, इसकी डेडलाइन 11 दिन है। प्रिविलेज्ड रैयतों (स्पेशल कैटेगरी) के लिए म्यूटेशन ज़्यादा से ज़्यादा 14 दिन तय किया गया है। कागज़ों में आम गलतियों और जाति से जुड़े करेक्शन वाली ज़मीन के म्यूटेशन के लिए 15 दिन तय किए गए हैं। मुश्किल केस के लिए अधिकारियों को ज़्यादा से ज़्यादा 75 दिन का टारगेट दिया गया है। अधिकारियों का दावा है कि पिछले दो सालों में दाखिल-खारिज के लिए ऑनलाइन डिस्पोज़ल रेट लगभग 25% से बढ़कर 75% हो गए हैं, और मार्च 2026 के आखिर तक 46 लाख से ज़्यादा पेंडिंग एप्लीकेशन क्लियर कर दिए गए हैं। चल रहे लैंड सर्वे के तहत 40 लाख से ज़्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है, जिसे 2027 तक पूरा करने का टारगेट है।

Updated on:
15 Feb 2026 07:50 am
Published on:
15 Feb 2026 07:50 am
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