पटना

Bihar Politics: जातीय गणित और सत्ता संतुलन, सम्राट चौधरी की ताजपोशी के पीछे क्या है भाजपा की रणनीति? जो बदल देगी बिहार

Bihar Politics: सम्राट चौधरी को यह अवसर देने से पहले बीजेपी ने सुशील मोदी के बाद तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को भी जिम्मेदारी सौंपी थी। लेकिन, पार्टी को उनसे अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी।

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Apr 15, 2026
सम्राट चौधरी

Bihar Politics बीजेपी ने सम्राट चौधरी को बिहार की कमान सौंपकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर एनडीए के लव-कुश समीकरण को एक बार फिर मजबूत करने की कोशिश की है। बिहार में लव-कुश समुदाय परंपरागत रूप से नीतीश कुमार के साथ रहा है और यह एनडीए का एक मजबूत वोट बैंक माना जाता है। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद इस परंपरागत वोट बैंक में किसी प्रकार की सेंधमारी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने सम्राट चौधरी पर दांव खेला है।

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नीतीश के बाद सम्राट पर बीजेपी का दांव

सम्राट चौधरी को कमान देकर बीजेपी ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि सत्ता का केंद्र भले ही बदल रहा हो, लेकिन राजनीतिक शक्ति (लव-कुश समीकरण) के पास ही बनी रहेगी, केवल नेतृत्व का चेहरा बदला गया है। जातिगत जनगणना के अनुसार लव-कुश समीकरण बिहार की जनसंख्या में तीसरे स्थान पर आता है। बिहार में कुर्मी-कोयरी समुदाय की आबादी लगभग 7.07 प्रतिशत है, जिसमें कोयरी की हिस्सेदारी करीब 4.2 प्रतिशत और कुर्मी की लगभग 2.87 प्रतिशत मानी जाती है। इसके अलावा लव-कुश समीकरण से जुड़ी अन्य जातियां जैसे दांगी, धानुक, अमात और गंगोता अब तक अधिकतर नीतीश कुमार के साथ जुड़ी रही हैं और परंपरागत रूप से एनडीए को समर्थन देती रही हैं। सीनियर पत्रकार लव कुमार का कहना है कि यही एक बड़ा कारण है, जिसकी वजह से पार्टी ने नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी के हाथों में कमान सौंपी है।

बीजेपी की नई रणनीति में सम्राट चौधरी की एंट्री

सम्राट चौधरी को यह अवसर देने से पहले बीजेपी ने सुशील मोदी के बाद तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी को भी जिम्मेदारी सौंपी थी। पार्टी ने सुशील मोदी के स्थान पर इन दोनों नेताओं को डिप्टी सीएम की कमान दी, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इसके बाद पार्टी ने बदलाव करते हुए सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा। इन दोनों नेताओं के प्रभावशाली प्रदर्शन के बाद पार्टी को सकारात्मक राजनीतिक संकेत मिले, जिसके बाद संगठन ने वोट बैंक समीकरण को साधते हुए सम्राट चौधरी पर भरोसा जताया।

सम्राट चौधरी के पिता और पूर्व मंत्री शकुनी चौधरी तथा नीतीश कुमार पुराने मित्र रहे हैं। जब नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ राजनीति शुरू की थी, तब शकुनी चौधरी ने उनका साथ दिया था। वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। हालांकि बाद में मतभेदों के कारण उन्होंने नीतीश कुमार का साथ छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का दामन थाम लिया था।

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Updated on:
15 Apr 2026 10:37 am
Published on:
15 Apr 2026 10:34 am
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