Bihar Politics: बिहार में नई सरकार के गठन से पहले जेडीयू ने बीजेपी के सामने अपनी नई शर्तें रख दी हैं। इसके साथ ही हरिवंश नारायण सिंह को राज्य सभा भेजने के फैसले पर पार्टी ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की है।
Bihar Politics: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ‘सत्ता हस्तांतरण’ (Power Transfer) की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसे लेकर दिल्ली से लेकर पटना तक बैठकों का दौर जारी है।
सूत्रों के अनुसार, सत्ता हस्तांतरण को लेकर जदयू और बीजेपी के बीच कई मुद्दों पर मतभेद उभर आए हैं। बताया जा रहा है कि जदयू नेतृत्व हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के फैसले से भी नाराज है और इसको लेकर उसने बीजेपी से कई सवाल उठाए हैं। इन सबके बीच बिहार में सत्ता हस्तांतरण को लेकर सियासी हलचल और तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन से पहले जदयू ने कई मुद्दों पर बीजेपी से अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। बताया जा रहा है कि जदयू ने गृह मंत्रालय और दो उपमुख्यमंत्री पद की मांग रखी है। इसके साथ ही जदयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी दावा ठोंक दिया है। जदयू सूत्रों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष पद उनके पास रहने से भविष्य में किसी भी राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति में उनका पलड़ा मजबूत रहेगा। यही वजह है कि पार्टी इस पद को लेकर गंभीरता से अपना दावा कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा भेजे जाने के फैसले से जदयू सबसे ज्यादा नाराज है। पार्टी का कहना है कि यदि बीजेपी को उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजना ही था, तो इस पर जदयू से पहले विचार-विमर्श करना चाहिए था। हालांकि, जदयू का आरोप है कि बीजेपी ने बिना किसी चर्चा के सीधे उन्हें राज्यसभा भेज दिया। जदयू नेताओं का यह भी कहना है कि जो हरिवंश पार्टी की कई अहम बैठकों से अनुपस्थित रहे और जिन्हें जदयू ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी से भी बाहर कर दिया था, उन्हें राज्यसभा भेजकर बीजेपी क्या संदेश देना चाहती है। पार्टी के मुताबिक, इससे यह संकेत जाता है कि जिसे जदयू बाहर का रास्ता दिखाना चाह रही थी, उसी को बीजेपी ने राज्यसभा भेजकर मानो पुरस्कृत किया है।