Bihar Politics नीतीश कुमार के बाद कौन? जेडीयू ने इसको लेकर बीजेपी के सामने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। जेडीयू बिहार में बीजेपी की मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी रणनीति के पक्ष में नहीं है।
Bihar Politics: बिहार की राज्य सभा की सभी पांच सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल की है। इनमें से एक सीट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी चुने गए हैं। उनके राज्य सभा जाने के लिए चुने जाने के बाद से ही बिहार में अगले मुख्यमंत्री कौन? इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए नेताओं की ओर से कहा जा रहा था कि ‘समृद्धि यात्रा’ के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ सकते हैं। हालांकि, बीजेपी की अपेक्षा के विपरीत जेडीयू नेता इस मुद्दे पर जल्दबाज़ी में नहीं दिख रहे हैं। वे और समय ले रहे हैं।
नीतीश कुमार के पद छोड़ने से पहले जेडीयू इस पर विस्तार से चर्चा करना चाहती है। जेडीयू नेता बिहार में बीजेपी की मध्य प्रदेश और राजस्थान वाली रणनीति के पक्ष में नहीं हैं। इन राज्यों में बीजेपी ने अपेक्षाकृत कम चर्चित नेताओं को मुख्यमंत्री बनाकर सबको चौंका दिया था, लेकिन बिहार में जेडीयू ऐसे किसी फैसले में बीजेपी के साथ खड़ी नहीं दिख रही है। जेडीयू ने इस मुद्दे पर अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ भी खींच दी है। पार्टी अपनी राजनीतिक ज़मीन और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए ही मुख्यमंत्री का चयन करने की बात कह रही है।
सीएम फेस को लेकर जेडीयू चाहती है कि बीजेपी कोई भी फैसला लेने से पहले उसपर गंभीरता से चर्चा करे। क्योंकि बिहार जैसे राज्य में, जहां जातीय और सामाजिक संतुलन बेहद संवेदनशील है, वहां अचानक लिए गए फैसले उल्टा असर भी डाल सकता है। इसी वजह से जेडीयू ने बीजेपी के सामने अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है और साफ संकेत दिया है कि
वह किसी भी चौंकाने वाले फैसले के कारण अपनी राजनीतिक ज़मीन और सामाजिक समीकरण को दांव पर नहीं लगाएगी। साथ ही, जेडीयू का यह भी कहना है कि सीएम फेस के मुद्दे पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (धर्मनिरपेक्ष) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसे एनडीए के अन्य सहयोगियों को भी पूरी तरह से विश्वास में लिया जाना चाहिए।
सीएम फेस को लेकर बीजेपी में करीब एक दर्जन संभावित नामों की चर्चा चल रही है। वहीं, जेडीयू का कहना है कि नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी उनकी पसंद का ही होगा। जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, बिहार के नए मुख्यमंत्री को नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाना होगा और उनकी राजनीति तथा सामाजिक गठबंधन के तौर-तरीकों का पालन करना होगा। जेडीयू उसी उम्मीदवार पर सहमति देगी। साफ है कि बीजेपी जिस नाम का ऐलान करेगी, उसे जेडीयू बिना शर्त स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
जेडीयू ने विधानसभा में अपने विधायकों की संख्या का हवाला देते हुए बीजेपी को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह कमजोर नहीं है। पार्टी के विधायक संख्या में बीजेपी से महज चार कम हैं। बिहार विधानसभा में बीजेपी के 89 विधायक हैं, जबकि जेडीयू के 85 विधायक हैं। सीएम फेस के साथ-साथ जेडीयू विधानसभा अध्यक्ष पद पर भी अपना दावा जता रही है। इन सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए विनोद तावड़े भी बिहार में कैंप कर रहे हैं।