
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने गंभीर सवाल उठाते हुए दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून-व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर और अधिक सख्त हुई है, लेकिन भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पुलिस से गलती हुई है। ऐसे में इस घटना के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के भी इस मामले पर बदले हुए तेवर देखने को मिले। अब तक इस मुद्दे पर मुखर रहे मांझी ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि इस मामले में सभी पक्षों को संयम बरतने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने आरा में 5 जुलाई को प्रस्तावित बहुजन महापंचायत को रद्द करने का आग्रह आयोजन समिति से किया। भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को लेकर 24 जून को बिलौटी में आयोजित महापंचायत के जवाब में 5 जुलाई को बिहार के आरा में प्रस्तावित बहुजन महापंचायत होना था। इसको लेकर पहले जीतन राम मांझी ने लोगों से बड़ी संख्या में आने का आग्रह कर रहे थे। लेकिन, आज (बुधवार) उन्होंने अपना रुख बदलते हुए अब महापंचायत के आयोजकों से फिलहाल कार्यक्रम स्थगित करने की अपील की है। जबकि पहले वे इस कार्यक्रम में शामिल होने का एलान किया था।
इधर, विद्यालय प्रशासन ने भी बहुजन महापंचायत के लिए स्कूल का मैदान उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। इसके बाद महापंचायत के आयोजन पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं और राज्य की सियासत भी गरमा गई है। महापंचायत से जुड़े नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समर्थन में आयोजित किया जा रहा था। वहीं, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि इस आयोजन को लेकर भाजपा असहज थी। सूत्रों के अनुसार, महापंचायत के लिए जिस तरह की जातीय गोलबंदी की जा रही थी, उससे एनडीए के परंपरागत वोट बैंक में नाराजगी की आशंका जताई जा रही थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।