
BPSC Exam Fraud: बिहार में प्रतियोगिता परीक्षाओं में सेंध लगाने वाले सॉल्वर गैंग हर बार धोखाधड़ी का कोई नया तरीका निकाल ही लेते हैं। बिहार पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) ने बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) द्वारा आयोजित असिस्टेंट एजुकेशन डेवलपमेंट ऑफिसर (AEDO) एग्जामिनेशन-2026 में गड़बड़ी और प्रश्न-पत्र लीक करने से जुड़े एक रैकेट का भंडाफोड़ किया है। EOU के DIG डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि इस पूरी धोखाधड़ी के तार पहले हुई कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में हुई धांधली से जुड़े हैं। इस मामले में अब तक मुंगेर, सोहसराय (नालंदा), वैशाली, बेगूसराय और नवादा समेत 5 अलग-अलग थानों में केस दर्ज कर कुल 35 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
इस परीक्षा में पारदर्शिता लाने के लिए जिस बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सहारा लिया गया था, सॉल्वर गैंग ने उसी को अपनी ढाल बना लिया। बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों के अंगूठे के निशान और चेहरे के मिलान (बायोमेट्रिक सत्यापन) के लिए जयपुर (राजस्थान) की कंपनी 'मेसर्स साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड' को अनुबंधित किया गया था।
लेकिन अनुसंधान के क्रम में यह बात सामने आई है कि इस कंपनी के कई कर्मी और कोऑर्डिनेटर खुद गहन रूप से इस जालसाजी में लिप्त थे। नियमों के अनुसार कंपनी के कर्मियों को यह शपथ पत्र देना था कि वे या उनके कोई सगे-संबंधी इस परीक्षा में अभ्यर्थी नहीं हैं, लेकिन जांच में पाया गया कि पकड़े गए अधिकांश बायोमेट्रिक कोऑर्डिनेटर और ऑपरेटर खुद इस AEDO परीक्षा के परीक्षार्थी बने बैठे थे।
परीक्षा के लिए डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर और सुपरवाइज़र के तौर पर काम करने वाले सुजल कुमार और समीर कुमार को मुंगेर मुफस्सिल थाना क्षेत्र से गिरफ़्तार किया गया था। उनकी बैकग्राउंड जांच से पता चला कि वे पहले से पटना के गर्दनीबाग थाना में दर्ज केस नंबर 724/24 में आरोपी हैं। यह मामला सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान बायोमेट्रिक धोखाधड़ी और फर्जी स्कॉलर बैठाने से जुड़ा था।
डॉ. मानवजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि प्रोटोकॉल के अनुसार, कंपनी को इन कर्मचारियों की बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करनी चाहिए थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय, बायोमेट्रिक ऑपरेशन की ज़िम्मेदारी ऐसे लोगों को सौंप दी गई जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और बाद में उन्होंने BPSC परीक्षा में भी बड़ी गड़बड़ी को अंजाम दिया।
जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया। नियमों के अनुसार, बायोमेट्रिक सिस्टम और जैमर चलाने वाले कर्मचारियों को रैंडमाइजेशन प्रक्रिया के बाद ही परीक्षा केंद्रों पर तैनात किया जाना था। लेकिन, कंपनी ने आखिरी समय में प्रक्रिया में हेरफेर किया और सीधे उन कर्मचारियों को तैनात कर दिया जिनके नाम आयोग को दी गई आधिकारिक सूची में शामिल ही नहीं थे।
नालंदा जिले के कंपनी सुपरवाइजर चंदन कुमार को पहले सोहसराय पुलिस स्टेशन इलाके के एक स्कूल से बायोमेट्रिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोपों के कारण हटा दिया गया था। फिर भी, कंपनी ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इन गंभीर आरोपों और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए, अब जयपुर स्थित फर्म 'साई एजुकेयर प्राइवेट लिमिटेड' को पूरी तरह से ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
सॉल्वर गैंग केवल डिजिटल सिस्टम में हेरफेर तक ही सीमित नहीं था। बेगूसराय मुफस्सिल थाना और छपरा तथा नालंदा जिलों से मिले इनपुट के आधार पर यह बात भी सामने आई है कि अभ्यर्थियों को ब्लूटूथ और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के भीतर उत्तर लिखवाने की बड़ी प्लानिंग की गई थी। इसके लिए आयोग द्वारा लगाए गए जैमर कार्य हेतु नियोजित कंपनी 'ECIL' के कर्मियों की भूमिका और संभावित खामियों की भी गहन जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा की जा रही है। EOU की टीम अब गिरफ्तार किए गए सभी 35 अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की तैयारी में है ताकि इस नेक्सस के मुख्य सरगना तक पहुंचा जा सके।