
Bunty Yadav Murder Case: बंटी यादव हत्याकांड में पटना पुलिस के दावे और परिजनों के आरोप आमने-सामने आ गए हैं। पुलिस जहां हत्या की वजह अवैध शराब कारोबार में हिस्सेदारी का विवाद बता रही है, वहीं परिजनों का दावा है कि बंटी की हत्या कथित देह व्यापार का विरोध करने के कारण हुई। अब परिजन पुलिस के शराब कारोबार वाले दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं। परिजनों ने कहा है कि यदि बंटी वास्तव में अवैध शराब कारोबार से जुड़ा था, तो वर्षों तक उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने वर्ष 2016 से अब तक जक्कनपुर थाना में तैनात रहे सभी थाना प्रभारियों की भूमिका की जांच और कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आरोपी के 'हाफ एनकाउंटर' और भरत तिवारी मुठभेड़ का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए हैं।
बंटी यादव हत्याकांड में पटना पुलिस का एक बयान अब उसी के लिए मुश्किलों का कारण बनता नजर आ रहा है। हत्या के बाद पटना पुलिस ने दावा किया था कि बंटी यादव का अवैध शराब कारोबार से भी संबंध रहा है। पुलिस के इस दावे के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का कहना है कि यदि बंटी यादव वास्तव में अवैध शराब कारोबार से जुड़ा था, तो उसके खिलाफ पहले कभी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उनका तर्क है कि यदि पटना पुलिस का दावा सही है, तो वर्ष 2016 से अब तक जक्कनपुर थाना में पदस्थापित रहे सभी थाना प्रभारियों (SHO) की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।
परिजनों ने कहा कि बिहार में 5 अप्रैल 2016 से लागू पूर्ण शराबबंदी कानून के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी थाना क्षेत्र में शराब की बिक्री, निर्माण या भंडारण पाया जाता है, तो संबंधित थाना प्रभारी को इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ एफआईआर दर्ज करने का भी प्रावधान है। इसी आधार पर परिजनों का कहना है कि यदि पटना पुलिस का यह आरोप तथ्यात्मक रूप से सही है, तो सरकार को कानून के अनुरूप वर्ष 2016 से अब तक जक्कनपुर थाना में पदस्थापित रहे सभी थाना प्रभारियों की भूमिका की जांच कर उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि पुलिस अपने दावे पर कायम है, तो कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
बंटी यादव की हत्या को लेकर परिजनों और पुलिस के दावों में बड़ा विरोधाभास सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि बंटी यादव की हत्या करबिगहिया क्षेत्र में कथित देह व्यापार का विरोध करने की वजह से की गई। वहीं, पटना पुलिस का दावा है कि हत्या की वजह अवैध शराब कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर हुआ विवाद था। परिजनों के अनुसार, बंटी यादव करबिगहिया इलाके में कथित तौर पर चल रहे देह व्यापार का विरोध करता था। उनका कहना है कि घटना से दो दिन पहले इस मामले को लेकर उसकी कथित सरगना मोनी से कहासुनी हुई थी। आरोप है कि इसके बाद बंटी का अपहरण किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।
वहीं, पुलिस ने इस मामले के आरोपी रवीश उर्फ बीसी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया है, जिसमें उसके पैर में गोली लगी। इसे लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस रिकॉर्ड में तीन हत्याओं के आरोपी रवीश उर्फ बीसी के मामले में पुलिस ने केवल पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार किया, जबकि वे भरत तिवारी मुठभेड़ का हवाला देते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई अलग-अलग क्यों रही और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।