पटना

लालू को जेल करवाया, ममता को धरने पर बैठाया… अब सुलझा रहे NEET छात्रा का केस, कौन हैं CBI ऑफिसर IPS राजीव रंजन?

पटना के NEET छात्रा केस को सुलझाने की जिम्मेदारी अब CBI के उस अधिकारी पर है, जिसने देश के कई बड़े स्कैम का पर्दाफाश किया है। IPS ऑफिसर राजीव रंजन, जिन्हें करप्शन और पोंजी स्कीम की जांच में एक्सपर्ट माना जाता है, इस हाई-प्रोफाइल केस को लीड कर रहे हैं।

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Feb 18, 2026
CBI अफसर IPS राजीव रंजन

NEET Student Death-Rape Case: बिहार की राजधानी पटना के शंभू हॉस्टल में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा के रेप और मौत के मामले की जांच अब एक ऐसे ऑफिसर के हाथ में है, जो हाई-प्रोफाइल स्कैम का पर्दाफाश करने और बड़े नामों को सजा दिलाने के लिए जाने जाते हैं। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद, CBI IG राजीव रंजन को यह केस सौंपा गया है। चारा स्कैम से लेकर शारदा चिटफंड स्कैम तक, कई केस में उनके रोल की खूब चर्चा हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वह NEET स्टूडेंट केस की गुत्थी कैसे सुलझाते हैं।

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सासाराम के रहने वाले हैं राजीव रंजन

मूल रूप से बिहार के रोहतास (सासाराम) जिले के करगहर थाना इलाके (अमंडेरी गांव) के रहने वाले राजीव रंजन सिक्किम कैडर के 2005 बैच के IPS ऑफिसर हैं। वह एक टीचर के बेटे हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई नोखा के सर्वोदय स्कूल से और हायर एजुकेशन आरा और पटना से ली। पटना कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन करने के बाद, उन्होंने UPSC क्रैक किया और सिक्किम कैडर के IPS ऑफिसर बन गए।

बड़े घोटालों की जांच में सख्त छवि

CBI में यह राजीव रंजन का दूसरा टर्म है। इससे पहले वह ACB कोलकाता, ACB भुवनेश्वर और स्पेशल क्राइम यूनिट में अहम पदों पर रहे हैं। उन्होंने 950 करोड़ रुपये के चारा घोटाले में अहम भूमिका निभाई, जिसके कारण RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को कोर्ट में दोषी ठहराया गया एर उन्हें सजा सुनाई गई।

राजीव रंजन ने पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के शारदा चिट फंड घोटाले की जांच का नेतृत्व किया, जिससे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार की मुश्किलें बढ़ गईं। उन्होंने IRCTC घोटाला और जमीन के बदले नौकरी घोटाला जैसे संवेदनशील मामलों की जांच में भी अहम भूमिका निभाई।

पोंजी और भर्ती घोटालों में एक्सपर्ट

राजीव रंजन की टीम झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) भर्ती घोटाला, UPPSC भर्ती में गड़बड़ियां और SSC पेपर लीक जैसे मामलों की जांच में भी एक्टिव थी। उन्हें पोंजी स्कीम या चिट फंड घोटालों की जांच में एक्सपर्ट माना जाता है। झारखंड के साहिबगंज में अवैध माइनिंग केस में भी उनकी जांच ने कई असरदार लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। जांच एजेंसियों के अंदर, उनकी पहचान एक ऐसे ऑफिसर के तौर पर है जो किसी केस का रास्ता तय करने से पहले फील्ड इनपुट, टेक्निकल सबूत और फॉरेंसिक एनालिसिस को बराबर अहमियत देते हैं।

CRPF और एंटी-टेरर में एक्सपीरियंस

CBI के अलावा, उन्होंने CRPF में भी काफी काम किया है। उन्होंने अयोध्या में श्री राम मंदिर और मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि की सुरक्षा करने वाली एलीट टीम को लीड किया। जम्मू-कश्मीर में नगरोटा (हीरानगर रेंज) के DIG के तौर पर काम करते हुए, उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन किए। उनकी शानदार सेवाओं के लिए उन्हें 2025 में प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से सम्मानित किया गया।

अब NEET छात्रा केस की चुनौती

पटना में NEET छात्रा की मौत ने राज्य के कानून-व्यवस्था और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। शुरुआती जांच को लेकर उलटे-सीधे दावे सामने आए। पोस्टमॉर्टम और FSL रिपोर्ट में सुराग मिलने और दवाब बढ़ने के बाद केस CBI को सौंप दिया गया। 12 फरवरी को CBI ने ऑफिशियली जांच अपने हाथ में ले ली।

इसके बाद राजीव रंजन की टीम पहले पटना स्थित हॉस्टल गई, जहां घंटों तक छानबीन की गई। इसके बाद टीम जहानाबाद गई और परिवार के सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ की। छात्रा के पर्सनल सामान, किताबों और डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच शुरू हुई। SIT द्वारा इकट्ठा किए गए CCTV फुटेज और DNA सैंपल की भी दोबारा जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि शुरुआती स्टेज में सबूतों से कोई चूक या छेड़छाड़ तो नहीं हुई थी।

क्या जांच की दिशा बदल सकती है?

राजीव रंजन के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए, वह हाई-प्रोफाइल मामलों में राजनीतिक शोर-शराबे से खुद को दूर रखते हुए सबूतों पर आधारित जांच को प्राथमिकता देते हैं। NEET छात्रा केस में, डिजिटल टाइमलाइन, कॉल डिटेल्स, लोकेशन डेटा और फोरेंसिक रिपोर्ट को क्रॉस-मैच करने पर भी जोर दिया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, टीम मामले के हर पहलू, जैसे क्राइम सीन, मेडिकल रिपोर्ट और शुरुआती पुलिस कार्रवाई की दोबारा जांच कर रही है।

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Updated on:
18 Feb 2026 04:22 pm
Published on:
18 Feb 2026 04:21 pm
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