पटना

बिहार: सम्राट चौधरी के सामने भ्रष्टाचार पर सख्ती के साथ वित्तीय संतुलन की चुनौती

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने राज्य की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है

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Apr 18, 2026
सम्राट चौधरी

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पदभार संभालते ही शीर्ष अधिकारियों को भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने, परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई ‘सात निश्चय’ (तीसरा चरण) योजना के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके बावजूद, चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में सुशासन सुनिश्चित करना सम्राट चौधरी के सामने एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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वित्तीय संतुलन की चुनौती

कई विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार की वित्तीय स्थिरता बनाए रखना सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। चौधरी पिछली NDA सरकार में वित्त विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके बावजूद, राज्य की मौजूदा वित्तीय स्थिति पर काफी दबाव है। इसकी मुख्य वजह बड़े पैमाने पर हुई भर्तियों के बाद वेतन और पेंशन जैसे अनिवार्य खर्चों में भारी बढ़ोतरी, तथा अप्रैल 2016 में लागू शराबबंदी के कारण राजस्व में आई कमी है।

सरकार पर वित्तीय बोझ अन्य कारणों से भी बढ़ा है। इनमें 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न भत्तों में की गई बढ़ोतरी और ‘मुख्यमंत्री रोज़गार योजना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएँ शामिल हैं। इस योजना के तहत लगभग 1.67 करोड़ महिला लाभार्थियों को पहली किस्त के रूप में ₹10,000 की राशि दी जा चुकी है। योजना के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी किस्त के रूप में ₹2 लाख तक की सहायता दी जानी है, जिससे सरकारी खर्च में और बढ़ोतरी होने की संभावना है।

कानून-व्यवस्था की चुनौती

चुनावी विश्लेषकों का कहना है कि नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने राज्य की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। यह चुनौती ऐसे समय में सामने आई है, जब पहले से ही सब्सिडी, पेंशन, वेतन और विभिन्न योजनाओं के लिए दिए जाने वाले ‘मैचिंग ग्रांट’ के खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उनका कहना है कि यह कार्य आसान नहीं है, क्योंकि मौजूदा समय में सरकार पर वित्तीय बोझ पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।

इसके अलावा, राज्य में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखना भी एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है। विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी पार्टियाँ NDA सरकार पर अपराध और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं पर नियंत्रण पाने में विफल रहने का आरोप लगा रही हैं। साथ ही, वे राज्य में बढ़ती ‘भीड़-हिंसा’ (मॉब वायलेंस) की घटनाओं को भी मुद्दा बना रही हैं।

हाल ही में अररिया में हुई एक घटना इसका उदाहरण बनी, जहाँ एक व्यक्ति की हत्या के बाद आक्रोशित भीड़ ने आरोपी की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

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Updated on:
18 Apr 2026 08:13 am
Published on:
18 Apr 2026 08:12 am
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