कांग्रेस के अधिकांश नेताओं ने राजद के साथ की राजनीति को ना कहा। इन विधायकों का मानना था कि राजद के साथ चुनाव लड़ने से पार्टी की छवि खराब हुई है।
Bihar Politics बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इस करारी हार के बाद महागठबंधन के दो मजबूत स्तंभ कांग्रेस और राजद में टूट की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पार्टी के शीर्ष नेताओं का इसपर अभी तक कोई बयान नहीं आया है, लेकिन सेकेंड लाइन के नेताओं के बयान से सियासी तापामन बढ़ गया है।
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर शुक्रवार को हुई बैठक में भी इसपर चर्चा हुई। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के सीनियर पदाधिकारियों और विधायकों से पार्टी के सीनियर नेताओं से जानना चाहा कि बिहार में राजद के साथ राजनीति को आगे बढ़ाया जाए या फिर बिहार में कांग्रेस अपने अकेले दम पर चुनाव लड़े? इसपर कांग्रेस के अधिकांश नेताओं ने राजद के साथ की राजनीति को ना कहा। इन विधायकों का मानना था कि राजद के साथ चुनाव लड़ने से पार्टी की छवि खराब हुई है। यही कारण है कि पार्टी को सीटें भी कम आईं।
सांसद पप्पू यादव ने भी खुलकर अपनी बात रखते हुए कहा कि, कांग्रेस को अगर बिहार में खुद को मजबूत करना है तो उसे राजद से अलग होना होगा। जबकि राज्य सभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह का मत इससे अलग था। वो राजद के साथ राजनीति करने के पक्ष में थे। उन्होंने इस बैठक में राजद और कांग्रेस के साथ की राजनीति को लाभकरी और बिहार की जरूरत भी बताया।
बिहार कांग्रेस की ओर से पहले भी आरजेडी से गठबंधन तोड़ने की मांग उठी है। कांग्रेस नेता शकील अहमद भी लंबे समय से आरजेडी से गठबंधन तोड़ने की मांग कर रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद राहुल-खरगे ने दिल्ली में समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों ने अपनी हार का कराण आरजेडी से गठबंधन बताया था।
बिहार कांग्रेस नेताओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि अब हर किसी को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। जमीन पर आकर उन्हें मेहनत करनी पड़ेगी। तब ही पार्टी खुद के दम पर खड़ी हो सकती है। इसको लेकर रोडमैप तैयार करने की काफी जरूरत है।
दिल्ली में कांग्रेस की बैठक के बाद कांग्रेस में टूट की चर्चाओं पर भी विराम लग गया। बिहार में विधानसभा चुनाव का परिणाम सामने आने के बाद से कहा जा रहा था कि कांग्रेस के सारे 6 नव-निर्वाचित विधायक कांग्रेस छोड़ एनडीए का दामन थामने वाले है। लेकिन, दिल्ली बैठक में सभी उपस्थित होकर इसपर फिलहाल विराम लगा दिया है।