पटना

300 रुपये की घूस के लिए 20 हजार का जुर्माना, जेल भी जाएंगे इंजीनियर साहब, कोर्ट ने सुनाया फैसला

बिजली विभाग के रिटायर्ड जूनियर इंजीनियर सुदामा राय को सिर्फ 300 रुपये की रिश्वत लेने के लिए एक साल की जेल और 20,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह केस 1991 का है और 35 साल बाद यह फ़ैसला सुनाया गया है।

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Feb 25, 2026
सांकेतिक तस्वीर (फोटो- AI)

Bihar News: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच, 35 साल पुराने एक मामले में बड़ा फैसला आया है। पटना की स्पेशल विजिलेंस कोर्ट ने बिजली विभाग के एक जूनियर इंजीनियर को दोषी ठहराया है, जो 1991 में सिर्फ 300 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। कोर्ट ने आरोपी सुदामा राय को दोषी ठहराते हुए न सिर्फ जेल की सजा सुनाई, बल्कि रिश्वत की रकम से कई गुना ज्यादा कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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क्या था पूरा मामला ?

यह मामला 1991 का है, जब नवादा जिले के गुनावा के रहने वाले विजय मिस्त्री ने अपनी लेथ मशीन के लिए बिजली कनेक्शन के लिए अप्लाई किया था। उस समय नवादा में पोस्टेड जूनियर इंजीनियर सुदामा राय ने कनेक्शन के लिए 500 रुपये की रिश्वत मांगी थी। बहुत मनाने के बाद, डील 300 रुपये में तय हुई। रिश्वत देने के बजाय, विजय मिस्त्री ने विजिलेंस डिपार्टमेंट से संपर्क किया। शिकायत की शुरुआती जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद, 14 अगस्त 1991 को विजिलेंस टीम नवादा पहुंची और जाल बिछाया। जैसे ही सुदामा राय ने 300 रुपये रिश्वत ली, टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।

समय पर चार्जशीट फाइल की गई

इस मामले में उस समय के जांच अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक (विद्युत कोषांग) अमरनाथ खन्ना ने जांच पूरी की और समय पर कोर्ट में चार्जशीट फाइल की। ​​स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कृष्ण मुरारी प्रसाद ने प्रॉसिक्यूशन का अच्छे से प्रतिनिधित्व किया। कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।

क्या सजा सुनाई गई?

पटना की स्पेशल विजिलेंस कोर्ट ने सुदामा राय को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के सेक्शन 7 के तहत एक साल की सश्रम कैद और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा, उन्हें सेक्शन 13(2) के साथ सेक्शन 13(1)(d) के तहत भी एक साल की सश्रम कैद और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। अगर जुर्माना जमा नहीं किया गया, तो एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद होगी।

35 साल बाद भी मिली सजा

यह मामला 1991 का है और फैसला अब 2026 में आया है। कानूनी प्रक्रिया लंबी थी, लेकिन आखिरकार, कोर्ट ने साफ संदेश दिया कि रिश्वत चाहे 300 रुपये की हो या 3 लाख रुपये की, अपराध तो अपराध है।

विजिलेंस डिपार्टमेंट की सख्ती जारी

जानकारी के मुताबिक, 2026 में अब तक कोर्ट ने भ्रष्टाचार के चार मामलों में दोषी ठहराया है। यह कार्रवाई पटना में विजिलेंस कोर्ट के जज मोहम्मद रुस्तम ने की। विजिलेंस इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया जारी है और भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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Published on:
25 Feb 2026 04:51 pm
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