पटना

Deepak Prakash MLC: राज्यपाल कोटे से मिली सदस्यता, बची मंत्री की कुर्सी; अब मनोनयन पर छिड़ा संवैधानिक विवाद

Deepak Prakash MLC: बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को राज्यपाल कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया गया है। इस फैसले से जहां उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट फिलहाल टल गया है, वहीं उनके मनोनयन की संवैधानिक पात्रता को लेकर नया राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है।
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Aug 05, 2026
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बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश (फोटो- दीपक प्रकाश फेसबुक)

Deepak Prakash MLC: राज्यपाल ने बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य मनोनीत कर दिया है। बिहार सरकार के मंत्रिमंडल की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर राज्यपाल ने बुधवार को अपनी मंजूरी दे दी। राज्यपाल की स्वीकृति के साथ ही दीपक प्रकाश आधिकारिक तौर पर बिहार विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य बन गए हैं। इसके साथ ही उनके मंत्री पद पर मंडरा रहा संवैधानिक संकट फिलहाल टल गया है। हालांकि, इस फैसले के साथ एक नया संवैधानिक और राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है।

अनुच्छेद-171 बना मुद्दा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद-171 के तहत राज्यपाल को विधान परिषद के कुल सदस्यों के एक-छठे हिस्से को मनोनीत करने का अधिकार है। बिहार विधान परिषद में यह संख्या 12 है। संविधान के अनुसार, राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने वाले सदस्य साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले होने चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि दीपक प्रकाश इन श्रेणियों में नहीं आते हैं। ऐसे में उनके मनोनयन को लेकर विवाद होना तय माना जा रहा है। हालांकि, इससे पहले भी राज्यपाल कोटे से ऐसे कई लोगों का मनोनयन होता रहा है, जिनकी योग्यता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

मनोनयन पर सियासी संग्राम

वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय का कहना है कि दीपक प्रकाश को आखिर किस क्षेत्र के प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल ने मनोनीत किया है, यह सार्वजनिक होने के बाद विवाद और गहरा सकता है। उनका कहना है कि जिस तरह विपक्ष पहले से ही उनके मंत्री पद को लेकर सवाल उठाता रहा है, उसे देखते हुए इस फैसले पर भी राजनीतिक टकराव तय है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने राज्यपाल के फैसले पर तंज कसते हुए कहा, "दीपक प्रकाश देश के बहुत बड़े साहित्यकार हैं। उनकी किताबें पूरी दुनिया में पढ़ी जाती हैं। संभवतः इसी उपलब्धि को देखते हुए राज्यपाल ने उन्हें मनोनीत किया है।"

वहीं, आरजेडी प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि जो लोग परिवारवाद के खिलाफ सबसे ज्यादा आवाज उठाते थे, वही अब "पिछले दरवाजे" से अपने परिजनों की राजनीति में एंट्री करा रहे हैं। उन्होंने कहा, "लालू प्रसाद के बेटे और बेटी कम से कम जनता के बीच चुनाव लड़कर आए हैं। लेकिन नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के बेटों ने बिना जनता का सामना किए ही राजनीति में प्रवेश किया है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को केवल "लॉलीपॉप" देकर भ्रमित किया है।

टला मंत्री पद पर संकट

दीपक प्रकाश को भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर मनोनीत किया गया है। देवेश कुमार ने पिछले सप्ताह विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अगले वर्ष मार्च तक था और अब दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी मार्च 2027 तक ही रहेगा। वह जल्द ही बिहार विधान परिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश पहली बार 20 नवंबर 2025 को मंत्री बने थे। इसके बाद नीतीश सरकार के इस्तीफे के पश्चात 7 मई 2026 को उन्होंने दोबारा मंत्री पद की शपथ ली। हालांकि, इस दौरान वह विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं बन सके थे। इसी मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा हुआ और जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार, दीपक प्रकाश और चुनाव आयोग से जवाब भी मांगा था। अब राज्यपाल कोटे से उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाए जाने के बाद इस पूरे मामले पर नया राजनीतिक और संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है।

Updated on:
05 Aug 2026 11:15 pm
Published on:
05 Aug 2026 11:13 pm