Gallantry Medal: गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर बिहार कैडर के तेजतर्रार IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन समेत 22 पुलिस अधिकारियों को मेडल दिए जाएंगे। कुंदन कृष्णन को यह सम्मान करीब 24 साल पहले हुई एक भयानक जेल घटना में उनकी भूमिका के लिए मिल रहा है।
Gallantry Medal: बिहार के 1994 बैच के IPS अधिकारी और फिलहाल बिहार STF के डायरेक्टर जनरल कुंदन कृष्णन को गणतंत्र दिवस 2026 पर राष्ट्रपति का 'वीरता पदक' (गैलेंट्री मेडल) से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें 24 साल पहले छपरा जेल में हुई एक खौफनाक मुठभेड़ के लिए दिया जा रहा है, जब कुंदन कृष्णन सारण के पुलिस अधीक्षक थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह भी घोषणा की है कि इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले सब-इंस्पेक्टर अर्जुन लाल और कांस्टेबल जितेंद्र सिंह को भी वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा।
यह घटना 28 मार्च 2002 को बिहार में लालू-राबड़ी शासन के दौरान हुई थी। छपरा मंडल जेल में बंद लगभग 1200 कैदियों ने अपने ट्रांसफर के आदेशों के खिलाफ विद्रोह कर दिया। कुछ ही पलों में कैदियों ने जेल पर कब्जा कर लिया। अवैध हथियार और विस्फोटक जमा किए गए और उनका कंट्रोल जेल परिसर से बाहर तक फैल गया।
सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया और जेल सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर जानलेवा हमले किए गए। हालात इतने खराब हो गए थे कि 28 मार्च की सुबह से 30 मार्च 2002 तक छपरा मंडल जेल पूरी तरह से दंगा करने वाले कैदियों के कंट्रोल में रही। किसी भी अधिकारी की जेल में घुसने की हिम्मत नहीं हुई।
30 मार्च 2002 को राज्य सरकार के आदेश पर जेल को कैदियों के चंगुल से आजाद कराने का ऑपरेशन शुरू हुआ। उस समय कुंदन कृष्णन सारण के पुलिस अधीक्षक थे। हालात की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया। चश्मदीदों के मुताबिक, माथे पर शिकन, आंखों में गुस्सा और हाथों में AK-47 लिए कुंदन कृष्णन जेल परिसर में दाखिल हुए। यह दृश्य किसी एक्शन फिल्म से कम नहीं था।
जेल के अंदर पुलिस और दंगा करने वाले कैदियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। कैदियों ने पुलिस पर गोलियों और बमों से हमला किया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। लगभग 3 से 4 घंटे तक चली इस झड़प के दौरान स्थिति बहुत तनावपूर्ण बनी रही।
इस ऑपरेशन के दौरान कुंदन कृष्णन खुद घायल हो गए थे। उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपना हथियार नहीं छोड़ा और ऑपरेशन का नेतृत्व करते रहे। आखिरकार, पुलिस ने जेल पर फिर से कंट्रोल कर लिया और हजारों कैदियों के भागने की कोशिश को नाकाम कर दिया।
इस ऑपरेशन में चार कैदी मारे गए, जबकि सात घायल हो गए। जिला पुलिस, मिलिट्री पुलिस और होम गार्ड के कुल 28 जवान भी घायल हुए। मौके से .315 बोर और 12 बोर के 33 खाली कारतूस, बम के टुकड़े और दूसरे हथियार बरामद किए गए।
कुंदन कृष्णन बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं। उनका जन्म 8 मार्च, 1969 को हुआ था। उन्होंने 1993 में UPSC परीक्षा पास की और IPS कैडर में शामिल हुए, 1994 में उन्हें बिहार कैडर में पोस्टिंग मिली। शुरू से ही कुंदन कृष्णन एक सख्त, निडर और काम करने वाले ऑफिसर के तौर पर जाने जाते थे। 2005 में नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद, कुंदन कृष्णन उन ऑफिसर्स में से एक थे जिन्होंने बिहार में कानून-व्यवस्था सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
गणतंत्र दिवस 2026 के मौके पर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड, सिविल डिफेंस और करेक्शनल सर्विस के 982 जवानों को वीरता और विशिष्ट सेवा पदक देने की घोषणा की। इसमें बिहार के 22 पुलिस ऑफिसर और जवान शामिल हैं। जिसमें दो ऑफिसर, DSP उमेश लाल रजक और SI नवरत्न कुमार को राष्ट्रपति पदक (PSM) मिलेगा, जबकि 17 अन्य पुलिस जवानों को सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया जाएगा।