भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अजय आलोक ने कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक के मार्ग में झारखंड का बांध जल्द खत्म होने वाला है।
देश के पांच राज्य में हुए चुनाव में से तीन राज्य असम, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी और NDA की जीत ने झारखंड में भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस बात पर एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार अब अगला निशाना है। डॉ. अजय आलोक ने प्रतीकात्मक लहजे में बड़ा संकेत देते हुए कहा कि गंगोत्री से गंगासागर तक की यात्रा में, झारखंड में अभी जो बांध खड़ा है, वह बहुत जल्द टूटने वाला है।
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अजय आलोक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर असम की जीत का जिक्र करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि असम में जिस तरह से कांग्रेस की 'लंका' में आग लगी है, उसके सूत्रधार बधाई के पात्र हैं। उन्होंने असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा के उन उम्मीदवारों की सूची भी जारी की है जिन्होंने वहां चुनाव लड़ा था।
अजय आलोक का मानना है कि हेमंत सोरेन के इन उम्मीदवारों ने असम में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाई, जिससे अंततः बीजेपी को फायदा हुआ। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मजबाट, भेरगांव, गोसाईगांव और रांगापारा जैसी सीटों पर जेएमएम उम्मीदवारों ने हजारों वोट हासिल किए, जिसे बीजेपी की जीत का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद भाजपा मुख्यालय में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया था। इस सम्बोधन के दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जीत के साथ गंगोत्री (उत्तराखंड) से गंगा सागर (पश्चिम बंगाल) तक कमल ही कमल खिला हुआ है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल, मां गंगा के किनारे बसे इन सभी राज्यों में अब भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं।
अजय आलोक के इस बयान को हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ संभावित राजनीतिक आक्रामकता और रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व का मानना है कि पड़ोसी राज्यों के चुनावी नतीजों का असर झारखंड की जनता पर भी पड़ेगा। वर्तमान में झारखंड में जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी के गठबंधन की सरकार है। बीजेपी लगातार राज्य में भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरती रही है और अब चुनावी जीत के उत्साह में पार्टी ने मोर्चा खोलने का स्पष्ट संकेत दे दिया है।