पटना

बिहार: पैसे के अभाव में तीन दिन तक पति के शव के पास बैठी रही पत्नी, फिर कफन पहनकर दी अंतिम विदाई

बिहार के खगड़िया से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है। गरीबी और बेबसी की मार झेल रही एक महिला अपने पति के शव के पास तीन दिनों तक बैठी रही, क्योंकि उसके पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे।
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Updated: 24 Jul 2026, 4:46 PM IST
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कफन पहनकर पति का अंतिम संस्कार करता पत्नी। फोटो स्थानीय ग्रामीण

बिहार के खगड़िया में गरीबी, बेबसी और समाज की संवेदनहीनता की एक ऐसी कहानी सामने आई है,जिसने इंसानियत को कठघरे में खड़ा कर दिया। खगड़िया में एक गरीब महिला अपने पति मन्नु साह के शव के पास तीन दिनों तक बैठी रही, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उसे न पैसे मिले, न कोई सहारा। वह कभी भगवान को कोसती, कभी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करती। विवश महिला कभी समाज की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखती। लेकिन उसकी पुकार सुनने वाला कोई नहीं था।

तीन दिनों तक झोपड़ी में पति का शव पड़ा रहा। आसपास रहने वाले लोग भी इस दर्दनाक मंजर से अनजान बने रहे। जब शव से दुर्गंध आने लगी, तब लोगों का ध्यान इस ओर गया। धीरे-धीरे बात मोहल्ले से निकलकर पूरे शहर में फैल गई। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद लोगों की संवेदनाएं जागीं और फिर सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ नगर प्रशासन भी मदद के लिए आगे आया। इसके बाद आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर मृतक का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया गया।

कफन पहनकर पत्नी ने दी पति को अंतिम विदाई

सबसे मार्मिक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मृतक मन्नु साह की पत्नी ने स्वयं कफन पहनकर अपने पति की चिता को मुखाग्नि दी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। जिसने भी यह मंजर देखा, उसका कलेजा कांप उठा। वार्ड संख्या-14 के पार्षद पप्पू यादव को जब गुरुवार को इस घटना की जानकारी मिली, वे तत्काल मृतक के घर पहुंचे और सहयोग का हाथ बढ़ाया। उनके प्रयास के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्थानीय लोगों और नगर प्रशासन ने मिलकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था कराई।

कैंसर ने छीनी जिंदगी, गरीबी ने छीन ली अंतिम विदाई

मन्नु साह पहले दाननगर मोहल्ले में किराये के मकान में रहकर मजदूरी करते थे। बाद में वे शहर से सटे रामचंद्रा गांव (वार्ड संख्या-5) में बांध के पार एक झुग्गी बनाकर रहने लगे। दिहाड़ी मजदूरी से किसी तरह परिवार का गुजारा चलता था। कुछ समय पहले उन्हें कैंसर हो गया। आर्थिक तंगी के कारण उनका समुचित इलाज नहीं हो सका। बीमारी बढ़ती गई और तीन दिन पहले उनकी मौत हो गई। लेकिन मौत के बाद भी परिवार की मुश्किलें खत्म नहीं हुईं। अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे।

बेटा था, लेकिन मां के पास उसका नंबर नहीं

स्थानीय लोगों के मुताबिक, मन्नु साह का एक बेटा दूसरे राज्य में मजदूरी करता है। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मां के पास बेटे का मोबाइल नंबर तक नहीं था। इसलिए वह अपने पति की मौत की सूचना भी उसे नहीं दे सकी। अकेली महिला तीन दिनों तक शव के पास बैठी रोती रही, लेकिन उसकी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया।

जब बदबू आई, तब जागी इंसानियत

तीन दिन तक किसी ने उस झोपड़ी की सुध नहीं ली। जब शव से बदबू आने लगी, तब लोगों को घटना की जानकारी हुई। इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और फिर समाज व प्रशासन हरकत में आया। यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस सामाजिक संवेदनहीनता की भी कहानी है, जहां एक गरीब व्यक्ति का शव पैसों के अभाव में तीन दिनों तक अंतिम संस्कार का इंतजार करता रहा। सवाल यह है कि अगर समय रहते किसी ने उस परिवार का हाल पूछा होता, तो शायद यह दर्दनाक तस्वीर सामने नहीं आती।

Updated on:
24 Jul 2026, 4:46 PM IST
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