
आज लालू प्रसाद के पास आज वह सब दिखाई दे रहा है। उनकी वह इच्छा पूरी हो गई है। संपूर्ण परिवार ने ज़ोर लगाया। उनकी पार्टी के मात्र पच्चीस विधायक ही जीते। मन में यह सवाल उठ सकता है कि मैं तो स्वयं उस पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष था। उसके बाद ऐसी बात मैं क्यों कह रहा हूँ ! मैं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष था। यह अतीत की बात हो गई। तेजस्वी ने मुझे न सिर्फ़ उपाध्यक्ष से हटाया बल्कि कार्यकारिणी में भी जगह नहीं दी। ऐसा क्यों ? क्योंकि मैं कह रहा था कि मतदाता सूची का सघन पुनर्निरीक्षण लोकतंत्र के विरूद्ध साज़िश है। इसके खिलाफ राहुल गांधी के साथ सड़क पर उतरो। संघर्ष करो। पुलिस की मार खाओ। जेल जाओ। लेकिन वह तो सपनों की दुनिया में मुख्यमंत्री का शपथ ले रहा था। उसको झकझोर कर उसके सपनों में मैं विघ्न डाल रहा था। लालू यादव धृतराष्ट्र की तरह बेटे के लिए राज सिंहासन को गर्म कर रहे थे। अब मैं मुक्त हो चुका हूँ। फुरसत पा चुका हूँ। अब कहानियाँ सुनाता रहूँगा..
शिवानंद तिवारी से पहले शनिवार को आरजेडी के सीनियर नेता अब्दुल बारी सिद्दकी ने भी चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए इशारों में आरजेडी नेता और राज्यसभा सदस्य संजय यादव पर प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि बिहार के मुद्दे पर बिहार के नेताओं को आपस में बैठकर विचार करना चाहिए। पार्टी सूत्रों का कहना है कि चुनाव परिणाम के बाद बहुत दिनों से पार्टी में उपेक्षित नेता अब खुलकर सामने आएंगे।
“आप हर सवाल का जवाब संजय, रमीज और तेजस्वी यादव से पूछिए… उन्हीं लोगों ने मुझे परिवार से निकाला है क्योंकि उन लोगों को कोई रिस्पॉन्सबिलिटी नहीं लेनी है… सवाल करने पर आपको बदनाम किया जाएगा, आपको गाली दिलवाई जाएगी, आपके ऊपर चप्पल उठाकर मारा जाएगा।” दिल्ली जाने से पहले पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए रोहिणी आचार्य ने ये बातें कही थी। इसके बाद से विवाद बढ़ता ही जा रहा है।