मोकामा के कुख्यात गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर छापेमारी के दौरान पुलिसकर्मियों की तलाशी का वीडियो वायरल होने पर पटना एसएसपी ने दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। दोनों भाई कभी अनंत सिंह (Anant Singh) के करीबी थे, लेकिन बाद में अलग गैंग बनाकर इलाके में दबदबा कायम कर लिया।
बिहार के मोकामा में कुख्यात गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर दबिश देने पहुंची पुलिस टीम की उसके गुर्गों द्वारा तलाशी लिए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पटना के एसएसपी ने बड़ा एक्शन लिया है। एसएसपी ने कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में दो पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, अनंत सिंह के समर्थक और पूर्व सरपंच पर हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर छापेमारी करने पहुंची थी। इसी दौरान पुलिसकर्मियों की तलाशी लिए जाने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद पुलिस विभाग की जमकर किरकिरी होने लगी।
करीब 15 साल पहले ट्रेनों में लूटपाट करने वाला सोनू-मोनू आज बिहार के मोकामा इलाके में आतंक का पर्याय बन चुका है। बताया जाता है कि यूपी के बाहुबली रहे मुख्तार अंसारी के गिरोह से जुड़े रहे सोनू-मोनू अब जदयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह के गढ़ में उन्हें खुली चुनौती देकर अपना गैंग मजबूत करने में जुटे हैं। दोनों भाई मोकामा के पंचमहला ओपी (मरांची थाना) क्षेत्र के जलालपुर गांव के रहने वाले हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, सोनू और मोनू पहले अनंत सिंह के लिए ही काम किया करते थे, लेकिन बाद में विवाद होने पर दोनों ने अलग होकर अपना गैंग बना लिया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2017 में दोनों भाइयों ने अनंत सिंह की हत्या के लिए 50 लाख रुपये की सुपारी ली थी, हालांकि वे अपने मंसूबे में सफल नहीं हो सके। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी लगातार बढ़ती गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के वर्षों में दोनों एक-दूसरे के जानी दुश्मन बन चुके हैं।
सोनू-मोनू का क्षेत्र में प्रभाव बढ़ने के बाद दोनों भाइयों ने बाहुबली विधायक अनंत सिंह की तर्ज पर अपने घर पर जनता दरबार लगाना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे इसकी चर्चा दूर-दूर तक फैलने लगी। उनके जनता दरबार में ऐसे लोग भी पहुंचने लगे, जिनकी समस्याएं विभागीय अधिकारी नहीं सुनते थे। आरोप है कि दोनों भाई फरियादियों की समस्याओं के समाधान के लिए मोकामा प्रखंड और अंचल कार्यालय के अधिकारियों व कर्मचारियों को फोन कर तुरंत काम करने का दबाव बनाते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, दोनों भाइयों का इतना प्रभाव था कि उनके फोन की घंटी बजते ही अधिकारी फरियादियों की समस्याओं के समाधान में जुट जाते थे। इसी वजह से इलाके में उनकी छवि “हीरो” जैसी बन गई और उनके घर पर सुबह से ही फरियादियों की लंबी कतार लगने लगी।