नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। अब सम्राट चौधरी के सामने उनके कार्यकाल में शुरू हुई अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि उनके कार्यकाल में शुरू की गई बड़ी योजनाओं और परियोजनाओं का भविष्य क्या होगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार में इस समय विभिन्न विभागों की करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में सम्राट चौधरी की नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगी। इसके साथ ही, नीतीश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स को भी पूरा करना नई सरकार की जिम्मेदारी होगी।
नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि उनके कार्यकाल में शुरू की गई बड़ी योजनाओं और परियोजनाओं का भविष्य क्या होगा। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, बिहार में इस समय विभिन्न विभागों की करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं चल रही हैं। ऐसे में नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगी। इसके साथ ही, नीतीश सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट्स को भी पूरा करना नई सरकार की जिम्मेदारी होगी।
नीतीश सरकार ने बिहार में लगभग 20 नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल खोलने की योजना बनाई थी। इनमें से कुछ का निर्माण कार्य अभी जारी है, जबकि कई परियोजनाएं अभी तक शुरू भी नहीं हो पाई हैं। इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के करीब 30 से 35 प्रतिशत पद खाली हैं। ऐसे में नई सरकार के सामने इन रिक्त पदों पर नियुक्ति करना और प्रस्तावित मेडिकल कॉलेजों को शुरू करना एक बड़ी चुनौती होगी।
बिहार के सरकारी स्कूलों में करीब एक लाख शिक्षकों के पद खाली हैं, जबकि वर्तमान में लगभग 3.5 से 4 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में नई सरकार के सामने इन रिक्त पदों पर नियुक्ति करना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ ही, स्कूलों के जर्जर भवनों की मरम्मत करना और उनमें बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना भी प्राथमिकता में शामिल होगा। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी स्थिति चिंताजनक है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के विश्वविद्यालयों में करीब 40 प्रतिशत तक शिक्षकों के पद खाली हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान नीतीश कुमार ने राज्य के लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। नई सरकार के सामने इस वादे को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने 10 लाख से अधिक लोगों को नौकरियां देने की बात कही थी। इसके साथ ही, औद्योगिक क्षेत्र में भी कई लक्ष्य अभी अधूरे हैं। राज्य में बड़े निवेश की गति अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ सकी है। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, करीब 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, लेकिन इनमें से एक बड़ा हिस्सा अब तक जमीन पर पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। ऐसे में नई सरकार के सामने इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।