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वेतन संकट, कर्ज बोझ और वित्तीय दबाव… बिहार में नई सरकार के सामने होंगी कई चुनौतियां

तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर सरकारी खजाना खाली करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि बिहार की सरकार अब दिल्ली से संचालित की जाएगी।
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पटना

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Rajesh Kumar Ojha

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Updated: 14 Apr 2026, 10:48 AM IST

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नीतीश कुमार

नीतीश कुमार आज कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही बिहार को नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा। प्रदेश में आजादी के बाद पहली बार भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की संभावना है। नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाली खजाने के सहारे शासन चलाने की होगी। इसको लेकर तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा है कि नीतीश सरकार ने सरकारी खजाना खाली कर दिया है और अब सरकार ‘दिल्ली’ से चलेगी।

बिहार देश का सबसे कर्जदार राज्य

बिहार देश का सबसे अधिक कर्जदार राज्य है। किसी भी सरकार की आय के दो प्रमुख स्रोत होते हैं रेवेन्यू रिसीट और कैपिटल रिसीट। रेवेन्यू रिसीट का मतलब सरकार की नियमित आय जैसे टैक्स आदि से होता है, जबकि कैपिटल रिसीट का अर्थ होता है सरकार को एकमुश्त मिलने वाली बड़ी राशि, जैसे कर्ज या उधारी। बिहार सरकार पर कर्ज अधिक होने की वजह से वर्तमान सरकार पूरी तरह केंद्र सरकार पर निर्भर है।

बिहार का कुल बजट 3.47 लाख करोड़ रुपये है। इसमें सरकार को लगभग 2.85 लाख करोड़ रुपये टैक्स (रेवेन्यू रिसीट) से प्राप्त होंगे, जबकि 62,475 करोड़ रुपये कैपिटल रिसीट के रूप में केंद्र सरकार और कर्ज के माध्यम से खजाने में आएंगे। राज्य की रेवेन्यू रिसीट (टैक्स का पैसा) का करीब 74 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार से प्राप्त होता है, जो फिलहाल पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। इसी तरह कैपिटल रिसीट के तहत मिलने वाले 64,475 करोड़ रुपये में से 99 प्रतिशत से अधिक राशि कर्ज के रूप में है।

कर्ज और ब्याज के दबाव में बिहार सरकार

बिहार पर इस प्रकार कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार को प्रतिदिन लगभग 132 करोड़ रुपये कर्ज और ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ते हैं। वर्ष 2025-26 तक बिहार सरकार पर कुल कर्ज लगभग 3.50 लाख करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर 3.88 लाख करोड़ रुपये हो गया है। 2026-27 में राज्य सरकार को अपने कुल बजट में से 25,364 करोड़ रुपये केवल ब्याज भुगतान पर खर्च करने होंगे। इसके अलावा 22,665 करोड़ रुपये मूलधन के रूप में लोन चुकाने में लगाए जाएंगे। इस तरह बिहार सरकार पर प्रतिदिन लगभग 132 करोड़ रुपये का भार कर्ज और उसके ब्याज के रूप में पड़ रहा है।

सरकारी कर्मचारियों का वेतन अटका

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महीने के 13 दिन बीत जाने के बावजूद बिहार सरकार के करीब 10 लाख कर्मचारियों में से लगभग 5 लाख कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। अधिकतर जिलों में वेतन बिल अभी तक ट्रेजरी तक भी नहीं पहुंच पाया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने फंड फ्लो को नियंत्रित रखने के लिए ‘स्लो पेमेंट्स’ की नीति अपनाई है। सरकार की योजना है कि 15 अप्रैल तक आवंटन पूरा कर 18 अप्रैल तक सभी कर्मचारियों के खातों में वेतन भेज दिया जाए। बताया जा रहा है कि यह कदम खजाने की स्थिति को संतुलित और बेहतर दिखाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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