पटना

पटना हॉस्टल कांड: पीड़िता के परिजन बोले- कपड़ों पर लगा था खून, मांगने पर डॉक्टर ने कहा- फेंक दिया

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की रेप के बाद मौत ने पटना पुलिस को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पीड़िता के परिजनों के आरोप ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है।

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Jan 18, 2026
AI जनरेटेड फोटो

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा के साथ गैंग रेप मामले में पटना पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि प्रभात मेमोरियल अस्पताल के नर्स और जूनियर डॉक्टर ने बताया था कि मेरी बेटी के कपड़े में खून लगा था। जब हमने अस्पताल प्रबंधन से अपनी बेटी के कपड़े मांगे तो चित्रगुप्त नगर थाने की थानेदार रौशनी और हास्टल संचालक की मौजूदगी में अस्पताल प्रशासन ने कहा था कि फेंक दिए। तुमको बेटी को इलाज कराना है या अपनी बेटी के कपड़े चाहिए?

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कटघरे में पुलिस

परिजनों की बात अगर सही है तो चित्रगुप्त नगर पुलिस ने इसकी जानकारी अपने सीनियर को क्यों नहीं दी? इससे पहले परिजनों ने जब चित्रगुप्त नगर थाने में पूरे मामले की जानकारी दी थी। थाना प्रभारी रौशनी कुमारी ने इसकी भी जानकारी अपने सीनियर को क्यों नहीं दी। जबकि परिजनों का कहना है कि पुलिस के सामने हमने अपने फर्द बयान में नौ जनवरी को ही दुष्कर्म की आशंका व्यक्त किया था।

हॉस्टल से अस्पताल तक मिटाये गए सुबूत

शंभू गर्ल्स हॉस्टल में पीड़िता संग हुई हवैनियत के सारे साक्ष्य मिटाने के प्रयास किए गए हैं। जो कि अब एसआईटी को एक दूसरे से जोड़ना एक बड़ा टास्क होगा। हालांकि फारेंसिक की टीम हॉस्टल पहुंचकर एक बार फिर से घटना से जुड़े साक्ष्य एकत्रित करने का प्रयास किया है। एसआईटी को कुछ सवाल के जवाब भी खोजने होंगे? जैसे अगर छात्रा पांच जनवरी को अपने कमरे में बेहोश मिली तो परिजनों को इसकी सूचना हॉस्टल प्रबंधन ने क्यों नहीं दिया?

साक्ष्य के साथ छेड़छाड़

हॉस्टल प्रबंधक के अनुसार छात्रा का कमरा अंदर से बंद था, दरवाजा को तोड़कर छात्रा को बाहर निकाला गया। लेकिन कमरे में दरवाजा तोड़ने के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। हॉस्टल में पीड़िता की दोस्तों ने बताया था कि छात्रा के अस्पताल ले जाने के बाद कमरे को पोछा गया था। हॉस्टल प्रशासन ने ऐसा क्यों किया? इसकी क्या जरूरत थी। और अन्त में जो सबसे अहम सवाल है कि पीड़िता के बेड पर उसका बिस्तर नहीं था। जबकि वह एक दिन पहले ही हॉस्टल आ गई थी।

अस्पताल प्रशासन की भूमिका पर खड़े हुए सवाल

इसी प्रकार से प्रभात मेमोरियल अस्पताल प्रशासन की ओर से क्या छात्रा के भर्ती के समय विजाइनल स्वाब की जांच कराई गई थी? अगर जांच हुई तो उसकी रिपोर्ट अस्पताल प्रबंधन अभी तक क्यों नहीं की है। यूरिन जांच के आधार पर डॉक्टर ने परिजनों से कहा कि छात्रा ने नींद की कई गोलियां खा ली है। लेकिन पोस्मार्टम रिपोर्ट में कुछ और ही तथ्य सामने आए। ये कुछ सवाल हैं जो कि पुलिस से लेकर अस्पताल को कठघरे में खड़े कर रहे हैं। एसआईटी को इसकी जांच कर आरोपी को गिरफ्तार करना होगा।

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Published on:
18 Jan 2026 12:57 pm
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