पटना के एसएसपी ने बुधवार को पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दुष्कर्म और मौत मामले में दावा किया कि पीड़िता के परिजन ही नहीं चाहते थे कि एफआईआर दर्ज नहीं हो।
पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही छात्रा के साथ दुष्कर्म और मौत मामले में पटना एसएसपी ने बुधवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक स्तर पर परिजन FIR दर्ज कराने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन प्रभात मेमोरियल अस्पताल से मिली सूचना के आधार पर मामला दर्ज किया गया। पटना एसएसपी ने प्रेस कांफ्रेंस में ऑन कैमरा पहली बार यह भी स्वीकार किया कि पुलिस से लापरवाही हुई। प्रभात मेमोरियल अस्पताल की ओर से सूचना पर कदमकुंआ पुलिस की ओर से और सूचना मिलने के बाद चित्रगुप्त नगर थाना की SHO की ओर से लापरवाही हुई। इसकी वजह से ही दोनों संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की गई है।
पटना एसएसपी ने प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए यह स्वीकार किया कि फॉरेंसिक जांच में पीड़िता के वस्त्र से जैविक साक्ष्य (स्पर्म) मिलने की पुष्टि हुई थी। इस साक्ष्य का डीएनए प्रोफाइलिंग और मिलान की प्रक्रिया जारी है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता के कमरे से एक दवा भी बरामद की गई थी। सिटी SP (पूर्वी) परिचय कुमार ने दावा किया कि पीड़िता ने पटना लौटते समय अरवल मोड़ से दवा खरीदी थी, उसी का उसने सेवन किया था। इसकी हर पहलू से मेडिकल और फॉरेंसिक स्तर पर जांच की जा रही है।
पटना पुलिस ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां साझा की हैं। हालांकि अधिकांश जानकारी पब्लिक डोमेन में पहले से थी। पटना पुलिस प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया। बुधवार को पटना IG जितेंद्र राणा, SSP कार्तिकेय के. शर्मा और सिटी SP ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सिर्फ अपना पक्ष रखा। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में पीड़िता के परिवार से मिली जानकारी के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर विधिवत अनुसंधान शुरू किया गया था। पुलिस ने लोगों से अपील भी की जांच पूरी होने से पहले किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें।
दरअसल, मंगलवार को जहानाबाद में पीड़िता के परिजनों की अपील पर एक बड़ी शांति यात्रा निकाली गई थी। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। शांति न्याय यात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि न्याय नहीं मिला तो पटना और फिर दिल्ली में हम अपना न्याय यात्रा निकालेंगे। यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता है।