पटना में नीट छात्रा की मौत के तार नेताओं तक पहुंचने के बाद यह मामला हाई प्रोफाइल हो गया है। आईजी पटना आज इस पूरे मामले की जांच करने भी घटना स्थल पर पहुंचे थे।
पटना में नीट छात्रा की मौत के तार नेताओं तक पहुंचने लगे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि छात्रा की मौत जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, कई काले सच सामने आने लगे हैं। गर्ल्स हॉस्टल के बाहर लगने वाली लग्ज़री गाड़ियां की लाइन और हॉस्टल संचालिका से नेताओं से गठजोड़ ने पूरे मामले को हाई प्रोफाइल बना दिया है। पुलिस का दावा है कि एक दो दिनों के अंदर कई हाई प्रोफाइल नेताओं की इस मामले में हो सकती है। पुलिस को उनके खिलाफ कई अहम साक्ष्य मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद एक हॉस्टल संचालिका बीमार पड़ गई हैं। उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबकि नेता जी के अंडर ग्राउंड हो गए हैं।
दरअसल, पटना के चित्रगुप्त थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा के साथ गैंग रेप के बाद मौत का मामला सामने आने के बाद बवाल बढ़ गया। बवाल बढ़ने पर सरकार ने आनन फानन में एसआईटी का गठन कर पूरे मामले की जांच का जिम्मा उसे सौंप दिया। पटना आईजी के पूरे मामले का नोडल ऑफिसर बनाया गया है। आईजी पटना आज पूरे मामले की जांच के लिए खुद घटनास्थल पर गए थे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साथ आस पास के लोगों से भी इस मामले में पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि आस पास के लोगों ने पटना पुलिस के सामने कई चौकाने वाले खुलासे किए हैं।
सूत्रों का कहना है कि आस पास के लोगों ने एसआईटी टीम के सामने स्वीकार किया है कि गर्ल्स हॉस्टल के बाहर प्रतिदिन शाम में लग्ज़री गाड़ियां की लाइन लगा करती थी। शुरूआती दौर में हम लोगों को लगा कि छात्रावास में रहने वाली छात्रा के परिजन लग्ज़री गाड़ियों से आया करते हैं। लेकिन, मामले के सामने आने के बाद पूरा राज खुल गया। आस पास के लोगों ने कहा कि हम लोग इसकी कई बार शिकायत भी किए थे, लेकिन छात्रावास के संचालक मोटी रकम देकर इस पूरे मामले को रफा-दफा करवा दिया करते थे। आस पास के लोगों का आरोप है कि गर्ल्स हॉस्टल की भूमिका संदिग्ध है। गर्ल्स हॉस्टल और उसके संचालक पर पहले से कई मामले दर्ज हैं।
05 जनवरी को छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद उससे आनन- फानन में प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़िता की मां का कहना है कि पुलिस और अस्पताल के डॉक्टर लगातार पूरे मामले को रफा दफा करने का दबाव बना रहे थे। इंकार करने पर उनकी ओर से जान से मारने तक की भी धमकी दी गई थी।