पटना

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव: BJP को हराने के लिए ‘सबकुछ’ करेंगे, PK ने खोल दिया चुनावी मोर्चा

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी को हराने के लिए पूरी ताकत लगाने का ऐलान किया है। 1995 से इस कायस्थ बहुल सीट पर बीजेपी का मजबूत जातीय समीकरण रहा है।
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May 26, 2026
Bankipur By-election
प्रशांत खिशोर- नितिन नवीन

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी को हराने के लिए “जो कुछ करना पड़ेगा, वो सब करेंगे” प्रशांत किशोर के इस ऐलान के बाद यह मुकाबला काफी रोचक हो गया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि इस सीट पर पिछले 40-45 वर्षों से बीजेपी का कब्जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज, बांकीपुर सीट पर बीजेपी को हराकर बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हार का हिसाब चुकता करेगी। यह सीट न सिर्फ बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है, बल्कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की भी रही है। प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। वहीं, बीजेपी ने भी उपचुनाव को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

बांकीपुर का जातीय गणित तय करेगा जीत-हार

बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती है। वर्ष 1995 से अब तक बीजेपी इस सीट पर कोई चुनाव नहीं हारी है। ऐसे में इस अभेद्य किले में सेंध लगाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं माना जाता। कायस्थ बहुल इस सीट पर सबसे अधिक करीब 70 हजार मतदाता इसी समाज के हैं। यही वजह रही है कि बीजेपी लगातार यहां जीत दर्ज करती रही है। पहले नवीन किशोर सिन्हा और बाद में उनके बेटे नितिन नवीन इस सीट से चुनाव जीतते रहे हैं। कायस्थों के अलावा भूमिहार, ब्राह्मण और राजपूत मतदाताओं की भी यहां बड़ी संख्या है, जिन्हें लंबे समय से बीजेपी का कोर वोट बैंक माना जाता रहा है। यही वर्ग इस सीट की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

बांकीपुर में क्यों नहीं चलता M-Y फैक्टर?

इसके अलावा यादव, वैश्य और कुर्मी मतदाताओं की भी इस सीट पर अच्छी-खासी मौजूदगी है। खासकर कायस्थों के बाद यादव समाज संख्या बल के लिहाज से अहम माना जाता है। वहीं, बांकीपुर में 30 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि दलित और महादलित मतदाताओं की संख्या करीब 31 हजार के आसपास बताई जाती है। हालांकि, कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण और वैश्य (व्यापारी वर्ग) के सामूहिक वोट बैंक की गोलबंदी के कारण बीजेपी यहां लगातार जीत दर्ज करती रही है। यही वजह है कि विपक्षी दलों खासकर RJD और कांग्रेस का सोशल इंजीनियरिंग मॉडल, यानी M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण, इस सीट पर अब तक प्रभावी साबित नहीं हो पाया है।

BJP के गढ़ में नया समीकरण बनाने की कोशिश

हालांकि, इस बार प्रशांत किशोर बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ब्राह्मण समुदाय से आने वाले और एक चर्चित राजनीतिक चेहरा होने के कारण पीके की नजर बांकीपुर के 18 से 34 आयु वर्ग के करीब 1.10 लाख युवा मतदाताओं पर है। वे ‘बिहार में रोजगार’ और ‘भविष्य में बदलाव’ जैसे मुद्दों को केंद्र में रखकर बीजेपी के कोर वोट बैंक में 20 से 25 फीसदी तक सेंधमारी की कोशिश में हैं। इसके साथ ही, प्रशांत किशोर इस चुनाव को ‘बिहार का भविष्य बनाम पुराना ढर्रा’ के नैरेटिव में बदलकर न्यूट्रल वोटर्स को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं। इसके साथ ही वे जन सुराज संगठन की ताकत और संसाधनों के सहारे बीजेपी के इस मजबूत गढ़ में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

Updated on:
26 May 2026 07:56 am
Published on:
26 May 2026 07:41 am
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