
Purnia Accident: बिहार के गोराडीह इलाके में बाढ़ के पानी ने एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। भागलपुर कोयली खुड़ाह गांव के पास नहर में डूबने से पांच लोगों की मौत के बाद गुरुवार को जब एक साथ पांच अर्थियां उठीं तो पूरा गांव रो पड़ा। सबसे दर्दनाक मंजर उस समय था, जब महज 6 साल की सोनाली ने अपनी मां और भाई-बहनों को आखिरी विदाई दी।
जिस उम्र में किसी बच्चे को मां की गोद और परिवार का सहारा चाहिए होता है, उस उम्र में सोनाली के सामने उसका पूरा संसार उजड़ गया। वह शायद इस हादसे की गंभीरता पूरी तरह समझ भी नहीं पा रही होगी, लेकिन मां और भाई-बहनों को खोने का दर्द उसके जीवन की सबसे बड़ी चोट बन गया।
बताया गया कि बाढ़ के बीच परिवार रास्ते से गुजर रहा था। इसी दौरान एक बच्चा पानी से भरे गहरे गड्ढे में गिर गया। उसे बचाने के लिए परिवार के लोग पानी में उतर गए। लेकिन देखते ही देखते एक के बाद एक लोग डूबते चले गए। हादसे में मंझो देवी और उनके तीन बच्चों की मौत हो गई। पड़ोस की 17 साल की अंशु कुमारी भी इस हादसे से नहीं बच सकी। ग्रामीणों ने सभी को पानी से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने पांचों को मृत घोषित कर दिया।
एक साथ इतने लोगों की मौत से गांव में मातम छा गया। कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला। अंतिम संस्कार के दौरान घाट पर मौजूद लोगों की आंखें नम थीं। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिन बच्चों की आवाज से घर कुछ घंटे पहले तक भरा हुआ था, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
अंशु कुमारी के परिवार का दर्द भी कम नहीं है। उसके पिता होमगार्ड जवान हैं और ड्यूटी पर तैनात थे। हादसे वाले दिन दोपहर करीब 12 बजे उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी। ड्यूटी पर जाने से पहले अंशु ने पिता से 50 रुपए लिए थे। पिता ने उसे पानी से दूर रहने और खेत की तरफ नहीं जाने की हिदायत दी थी। उस वक्त उन्हें क्या पता था कि बेटी से हुई यह सामान्य सी बातचीत उनकी आखिरी बातचीत बन जाएगी।
एक तरफ मंझो देवी के परिवार के चार लोगों की मौत ने घर को उजाड़ दिया, तो दूसरी तरफ अंशु की मौत ने उसके माता-पिता को गहरा सदमा दिया।
हादसे के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए की सहायता देने की बात कही है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और आर्थिक मदद का भरोसा दिया। उन्होंने बाढ़ के दौरान लोगों को हो रही परेशानियों और नहरों की बदहाल स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बाढ़ से बचाव के नाम पर पिछले सालों में हुए खर्च की भी जांच होनी चाहिए।
लेकिन फिलहाल इन सवालों से ज्यादा बड़ा दर्द उस छोटी बच्ची का है, जिसने खेलने और मां की गोद में रहने की उम्र में अपने ही परिवार को अंतिम विदाई दी। पूर्णिया का यह हादसा सिर्फ पांच मौतों की खबर नहीं है, बल्कि उस मासूम सोनाली की कहानी है, जिसकी आंखों के सामने उसका पूरा परिवार बिखर गया।